भगवान की याद के साथ साथ अपना काम करते रहना भी जरूरी है...बिहार से प्रेरक कहानी
मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कहानी सुना रहे हैं | इस कहानी का शीर्षक “भगवान की याद” है । बहुत समय पहले की बात है जब उत्तर बिहार के लोग राजधानी या दक्षिण बिहार जाने के लिए नाव के सहारे गंगा पार कर आते थे | एक बार की बात है जब आंधी तूफान आया और नाव बुरी तरह डोलने लगा और अपने गन्तव्य से विपरीत दिशा में भी जाने लगा । सभी लोग डर गये और उस नाव चलाने वाले भी भगवान को याद करने लगे |तभी मुख्य नाविक आया और उसने कहा कि भगवान को याद करते हुए अपना परिश्रम भी जारी रखो जरुर ही सफलता मिलेगा तो सभी नाविकों ने फिर कार्य करना चालू कर दिया तब वह नाव धीरे-धीरे खतरे से उबर गया । सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Nov 09, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
मुक्ति गाना गाई जिंमा रे, ओरा नर बुई सी सुरे...ओड़िया गीत
गाँव तालशिरिगढ़ा, पोस्ट तालशिरिगढ़ा, जिला बरगढ़ (उड़ीसा) से देवकी साहू अपने क्षेत्रीय बोली में एक गीत सुना रही है :
मुक्ति गाना गाई जिंमा रे, ओरा नर बुई सी सुरे-
खुदा और मानव ताले, जीवा नर गितार धरे-
छोट-छोट छोटना अणि मिशी गीना रे-
झरना मिशी अमे नदी येमा रे...
Posted on: Nov 09, 2016. Tags: DEVKI SAHU SONG VICTIMS REGISTER
हो पिया भगे डुमरा का फूल केसे रखूं फूल पिया भगे...पारम्परिक गीत
ग्राम-देवरी जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया बोल रहे हैं कि आजकल लड़के बच्चे माता-पिता को दाई-दाऊ नहीं बोलते और सुन-सुन के मम्मी-पापा बोलते हैं जो कि पारम्परिक नाम नहीं है जिससे वे दुखी हैं और इसी बात पर फूलों पर उनके किये एक गीत सुनाना चाहते हैं जिससे वे अपने रीति रिवाज के बारे में सीख सकें:
हो पिया भगे डुमरा का फूल केसे रखूं फूल पिया भगे-
अँधा ला दाल भात गीवा डरा काल फूले दो काहेक बैठे-
पिया भगे डुमरी का फूल केसे रखूं फूल पिया भगे
रान्दला दाल भात गीवा डरा का...
Posted on: Nov 08, 2016. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
वह चिड़िया जो चोच मार कर दूध भरे जुडी के दाने खा लेती है...बाल कविता
गाँव केरकेट्टा, पोस्ट जोगा, थाना उटारी (झारखण्ड) से अंजनी कुमारी एक कविता सुना रहीं है-
वह चिड़िया जो चोच मार कर दूध भरे जुडी के दाने खा लेती है-
वह छोटी संतोषी चिड़िया नीले पंखो वाली मैं हूँ-
मुझे उनसें बहुत प्यार है-
वह चिड़िया जो चोच मार कर बूढ़े एंव दादा के खातिर रस निकाल कर ले जाती है-
वह छोटी संतोषी चिड़िया नीले पंखो वाली मैं हूँ-
मुझे उनसें बहुत प्यार है-
वह चिड़िया जो चोच मार कर चढ़ी नदी का दिल टटोल कर जल का मोती ले जाती है-
वह छोटी संतोषी चिड़िया नीले पंखो वाली मैं हूँ-
मुझे नदी से बहुत प्यार है...
Posted on: Nov 08, 2016. Tags: ANJANI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
किसान स्वर : इस ठण्ड के मौसम में सरसों, अलसी, मसूर, चना, दीर्धकालीन उड़द लगा सकते हैं...
कृषि विस्तार अधिकारी कार्यलय बतौली जिला सरगुजा (छत्तीसगढ़) से प्रकाश गुप्ता और उनके साथ हैं कृषि विशेषज्ञ बुध साय और उनके द्वारा बताया जा रहा है कि वर्तमान मौसमी स्थिति में पानी की कम से कम लागत में सरसों, अलसी, मसूर, चना, दीर्धकालीन उड़द जैसे फसलों को लगाया जाय ताकि अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है | ये फसलें ठण्ड के मौसम में एक या दो सिंचाई से ही अच्छी फसल दे सकती हैं और जहाँ पर सिचाई की सुविधा न हो वे पानी वाला पंप प्राप्त करने की योजना का लाभ उठाने के लिए अपने निकटतम कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क करें | सरकार पम्प के साथ साथ पानी पहुंचाने के लिए पाइप भी रियायती दर पर दे रही है । प्रकाश गुप्ता@9584513018
