स्वास्थ्य स्वर : गेंहू के ज्वारे का रस बनाने का घरेलू तरीका-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से एच डी गांधी गेंहू के ज्वारे का रस बनाने का घरेलू तरीका बता रहे हैं| जिन्हें खून की कमी हो वे इसका उपयोग कर लाभ ले सकते हैं| गेहूं के ज्वार को सात जगह एक-एक दिन के अंतराल में बुवाई कर दें| जब दाने अंकुरित होकर बढ़ जायें, तब उसे जड़ के ऊपर काट लें| उसमे गिलोय के 20 ग्राम टुकड़े काटकर मिला लें| उसके बाद उसका जूस निकाल लें| और मिश्री मिलाकर खाली पेट सेवन करें| लाभ हो सकता है| अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं : एच डी गांधी@9111061399.
Posted on: Aug 01, 2019. Tags: CG HD GANDHI HEALTH RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
ये खोली ला बान मारे...गीत-
ग्राम-पोलमी, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से चतुरराम साहू अपने साथी के साथ एक गीत सुना रहे हैं :
ये खोली ला बान मारे-
बोली के रस दब सजगा-
ये खोली के हवय उट पुट रसदा-
ये खोली ला बान मारे-
ये खोली ला समुज बुताय ले-
सिरा की कुदाईया रुपनी लगईय...
Posted on: Aug 01, 2019. Tags: CG CHATURRAM SAHU KABIRDHAM SONG VICTIMS REGISTER
जम्पा के जमती फहारे पाके ली...गीत-
ग्राम पंचायत-धूमाडांड भगतपरा, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी एक गंगा दशहरा गीत सुना रहे हैं :
जम्पा के जमती फहारे पाके ली-
प्रभू मिरोमा-
गंगा माई लहर देहे रे-
जम्मो सीजीनेट सुनईया मन-
अपन आदिवासी परंपरा ददरिया उधवा ला-
गावा सीजीनेट हर तोर लेहे रोजीना संदेश रिकॉर्ड करा मिरुमा...
Posted on: Aug 01, 2019. Tags: CG ROOPLAL MARAVI SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन...देश भक्ति गीत-
ग्राम-भेडागढ़, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम से विद्या नायक सावन के महीने में एक शिव भजन सुना रही हैं:
मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन-
शांति का उन्नति का प्यार का चमन-
इसके वास्ते निसार है मेरा तन मेरा मन-
ए वतन, ए वतन, ए वतन-
जानेमन, जानेमन, जानेमन-
इसकी मिट्टी से बने तेरे मेरे ये बदन...
Posted on: Aug 01, 2019. Tags: CG KABIRDHAM SONG VICTIMS REGISTER VIDYA NAYAK
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती...कविता-
ग्राम-पोलमी, जनपद-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से चतुरराम साहू एक कविता सुना रहे हैं :
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती-
नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है-
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है-
मन का विश्वाश रगों मे साहस भरता है-
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है...
