माँ को मांगी हूँ भात, पापा को मांगी हूँ भीत...ओड़िया गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक ओड़िया गीत सुना रहे हैं :
माँ को मांगी हूँ भात, पापा को मांगी हूँ भीत-
एकी देबो दुई हांथ, दुको बुजी बोको लाता हुंतो-
हंतर बत्ता सबुजाडू ची-
सहा के उ कत्ता जगा ते अजडा ची...
Posted on: Apr 04, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
झुलिया मा झूले मोर संबलपुर समलाई...देवी भजन-
खुटनपारा, ग्राम पंचायत-शारदापुर, पोस्ट-सुलसुली, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से मिहीलाल एक देवी भजन सुना रहे हैं :
झुलिया मा झूले मोर संबलपुर समलाई-
गोदना गोडवे मोर डोंगरगढ़ बमलाई-
लाली चुनर ओढ़ आई रे दाई-
सरगुजा ले मोर महामाई रे दाई-
झुलिया मा झूले मोर संबलपुर समलाई-
गोदना गोडवे मोर डोंगरगढ़ बमलाई...
Posted on: Apr 04, 2019. Tags: BALRAMPUR CG MIHILAL SONG VICTIMS REGISTER
impact : संदेश रिकॉर्ड करने के बाद राशन कार्ड में नाम जोड़ दिया गया है, सभी को धन्यवाद...
ग्राम-नवगोई, पोस्ट-रघुनाथ नगर, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से राजपति सिंह परस्ते बता रहे हैं कि उनका राशनकार्ड बना था| जिसमे उनके बच्चे का नाम नहीं जुड़ा था, उन्होंने कई बार ग्राम सभा और सचिव, सरपंच के पास आवेदन किया| लेकिन काम नहीं हो रहा था| वे काफी समय से कोशिश कर रहे थे| फिर उन्होंने सीजीनेट में अपनी समस्या को रिकॉर्ड किया जिसके 2 सप्ताह बाद राशन कार्ड में बच्चे का नाम जोड़ दिया गया| इसलिये वे सीजीनेट के साथियों और संबंधित अधिकारियों को धन्यवाद दे रहे हैं| जिन्होंने उनकी मदद की |राजपति सिंह परस्ते@9669480733.
Posted on: Apr 04, 2019. Tags: BALRAMPUR CG IMPACT STORY RAJPATI SINGH PARSTE SONG VICTIMS REGISTER
काखर गाहूँ माता काखर बजाहूँ मै, ऐ दाई काखर लेहूं परनाम हो दाई...देवी भजन-
ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक देवी भजन सुना रहे हैं :
काखर गाहूँ माता काखर बजाहूँ मै-
ऐ दाई काखर लेहूं परनाम हो दाई-
सेवा ला लेले महारानी गे-
ऐ दाई काखर लेहूं परनाम हो दाई-
ऐ दाई काखर लेहूं परनाम हो माई-
रामा के गाहूँ माता किसुन बजाहूँ गे...
Posted on: Apr 04, 2019. Tags: CG MEVALAL DEVANGAN SONG SURGUJA VICTIMS REGISTER
जीवन में सभी को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उससे हतास नहीं होना है...कथा-
ग्राम-महेशपुर, पोस्ट-लटोरी, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से शावित्री यादव एक कथा सुना रही हैं :
इस संसार में हमारी जीवन यात्रा बड़ी अजीब होती है| इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा| जिसने ठोकरों का सामना न किया हो| मंजिल तक पहुचने के लिये हमें कई बार ऐसे रास्तो को पार करना पड़ता है| जिसमे पैर में छाले पड़ जाते हैं| लेकिन के इससे क्या हम चलना छोड़ दें| जब एक बच्चा चलाना सीखता है, तो वह बार-बार गिरता है| और फिर उठकर चलता है| लेकिन हम उसे चलने से रोकते नहीं| तो बड़े लोग क्यों जीवन से हार मानकर जीवन को रोकना चाहते हैं| जबकि रुकने का मतलब तो जीवन का अंत है| इसलिये जीवन में सोच समझकर आगे बढ़ते रहना चाइये| और गलतियों से सीखना चाहिये| जिससे दोबार गलती न हो|
