इंसान और जीवन...एक कविता
आलीशान इमारतो और महलो के बीच पलता इंसान
महँगी और फर्राटेदार कारो के पीछे भागता इंसान
सुविधा और सोहरत के नाम पर ऐठता इंसान
दो जून की रोटी की आस में चाय की दुकानों पर सड़ता बचपन रुपी इंसान
भीख की आस में चौराहे पर चवन्नी की तरह नाचता इंसान
पेट की तड़प के वास्ते कूढ़े के ढेर में जीवन ढूँढता इंसान
अपने तन ढकने के वास्ते दूसरो का मल साफ़ करता इंसान
भूख मिटाने की आस में झूठे बर्तन साफ़ करता इंसान
इलाज की आस में अस्पतालों में दम तोड़ता इंसान
कुछ कमाने की आस में रिक्से पर बोझ ढोहता इंसान
कुछ पाने की आस में चोरी-डकैती करता इंसान
हवस मिटने की आस में मासूमो की इज्जत लूटता इंसान
अपना हक़ पाने की आस में अधिकारों की लड़ाई लड़ता इंसान
संबंधो की आस में अपमान और अत्याचार सहता इंसान
मोक्ष की आस में सन्यासी के रूप में जीवन जीता इंसान
नए जीवन की आस में चिता रुपी शय्या में सोता इंसान
हाय ये इंसान, हाय ये इंसान…
कैसा है ये इंसान कैसा है ये इंसान…
Posted on: Jul 21, 2013. Tags: KM Yadav
लेखन भी एक बला है !
हमारे वो कुछ शब्द उन्हें इतने नागवार गुजरे
कि उन्हें शब्दों से ही नफरत होने लगी
कहते है अक्षरों से शब्द बनते है और शब्दों से विचार
तो फिर विचारो को शब्दों की शक्ल देना गुनाह क्यों
हमारा इरादा तो सिर्फ बयां ए हकीकत था
पर न जाने क्यों उन्हें यह अफसाना पसंद न था
यह सच है हमारे खून का सम्बन्ध किसी महीम से नहीं
और हमारे पास किसी विलायती तालीम का तजुर्बा भी नहीं
पर हम भी चार पोथी का इल्म रखते है
शब्द और अक्षर के बीच का अर्थ समक्षते है
इस लोकतंत्र ने कल हमसे हमारा सपना छीना था
और आज यह हमसे हमारे शब्द भी छीन रहा है
कभी फुर्सत मिले तो अपने अक्श से बाहर भी देखिएगा
इन छोटे छोटे अक्षरों और शब्दों का भी अपना एक सम्मान होता है
Posted on: Jul 09, 2013. Tags: KM Yadav
झूला डाल देबय नीबू के दरार में...एक बघेलखंडी सावन गीत
झूला डाल देबय नीबू के दरार में
सावन के बहार में ना २
मै तो जात रहली अगुवारे
चली गई पिछुवारे
मै नाही जानू तोहरे बारे के मोहरे बा
सावन के बहार बा ना २
झुला डाल देबय नेबू के दरार में
सावन के बहार में ना
मै तो सानत रहली आटा
गड गया पैर में काँटा
मै नाही जानू तोहरे बैरी के ओसार बा
सावन के बहार बा ना
मै नाहीं जानू तोहरे बैरी के ओसार बा
सावन के . ....................
झुला डाल देबय नीबू के दरार में
सावन के बहार में ना
Posted on: Jul 04, 2013. Tags: Usha Yadav
Kajali song from Rewa Madhya Pradhesh...
Archana Yadav from Bitaul village in Rewa district in MP is singing a Kajali song.
जौने दिन सीता कहिरिसिरा माया बा हो न हो दिना ना थ
रामा हो गैबे ये रजिया ओ ही दिना ना
अपने महलिया से माया गोहरामय
सुना हो पूतना ना तू करती लेते दुसर बियहवा सुन हो पूतना
कैसे के रची माया दुसर बियहवा
ना ही हो भुलाया ना माया सीता के चुनरिया ना ही भुलाय ना
अपने महलिया से चाची गोहरामय सुने हो पूतना
तू कराती लेते दुसर बियहवा सुनहो पूतना
कैसे के रची चाची दुसर बियहवा नाही हो भुलाय ना
चाची सीता के सिंदुरवा नहीं हो भुलाय न
जौने दिन सीता कहिरिसिरा मनवा वो ही दिन ना
रामा हो गैबे ये रजिया वही हो दिन ना
Posted on: Jun 30, 2013. Tags: ARCHANA YADAV REWA
मच्छर, सांप से बचने इस मौसम महुए के बीज की खल्ली का धुंआ जलाएं
भोपाल से मोहन यादव ने बारिश में मच्छरों व जहरीले कीड़ो से बचने के लिए जरुरी प्राथमिक उपायों के बारे में बताया हैं खास तौर से घर के आस पास की सफाई तथा घरो में सोते समय गुल्ली ( महुए के फल का बीज) के खल्ली का धुआ और मच्छर दानी लगा कर सोना चाहिए | अधिक जानकारी के लिए मोहन जी से 8602008777 पर संपर्क कर सकते हैं
