जागो-जागो री आदिवासी, हमरे गाँव के नौजवान...

ग्राम-आलमपुर, पोस्ट-पाटाखेड़ा, तहसील-चिचोली, जिला-बैतूल, (मप्र) से नीलम यादव जी एक युवा प्रेरणा गीत गा रही हैं:
जागो-जागो री आदिवासी, हमरे गाँव के नौजवान
जागो-जागो री आदिवासी, हमरे गाँव के नौजवान
जागो-जागो री आदिवासी...
जागो-जागो रे आदिवासी, हमरे गाँव के निवासी
हमरे गाँव के निवासी, हमरे गाँव के निवासी
जागो-जागो रे आदिवासी, हमरे गाँव के निवासी
जागो-जागो री आदिवासी...
अपने गाँव में, अपने गाँव में, होती पूरी फसल खेत-बाड़ी
जागो-जागो री आदिवासी...

Posted on: Sep 24, 2014. Tags: Neelam Yadav SONG VICTIMS REGISTER

बेगा मंदाल मिवा डेरा, भवानी मैया...गोंडी भक्ति गीत

ग्राम-आलमपुर, पोस्ट-पाटाखेड़ा, तहसील-चिचोली, जिला-बैतूल, मध्य प्रदेश से नीलम यादव जी एक गोंडी गीत गा रही हैं इस गीत में देवी भवानी माँ की स्तुति की गयी हैं:
बेगा मंदाल मिवा डेरा, भवानी मैया
बेगा मंदाल मिवा डेरा, भवानी मैया
सलकनपुर ता है निवा डेरा
बेगा मंदाल मिवा...
हाथ ते निवा, त्रिशूल हयु
हाथ ते निवा, त्रिशूल हयु
बेगा मंदाल मिवा...

Posted on: Sep 23, 2014. Tags: Neelam Yadav SONG VICTIMS REGISTER

तिरंगा मेरा तीन रंग का...

विवेचना सिंह यादव, ग्राम-डभौरा, जिला-रीवां, मध्यप्रदेश से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक गीत प्रस्तुत कर रही हैं :
भारत ते तिरंगा लहराए
दिल दुश्मन काहें जलाए...तिरंगा मोरा तीन रंग का
तिरंगा मोरा तीन रंग का...
भारत ते...
मुझे केशरिया रंग इसलिए भाए
वीरता का प्रतीक कहलाए
तिरंगा मोरा तीन रंग का
भारत ते...
मुझे सफ़ेद रंग इसलिए भाए
सच्चाई का प्रतीक कहलाए
तिरंगा मोरा तीन रंग का
भारत ते...
मुझे हरा रंग इसलिए भाए
हरियाली का प्रतीक कहलाए
तिरंगा मोरा तीन रंग का
भारत ते...

Posted on: Aug 18, 2014. Tags: SONG VICTIMS REGISTER Vivechna Yadav

कजली खेलेले जनक दुलारी,नईहर दुलम होइहैं न...बघेलखंडी कजली गीत

बहिनी दरबार जिला रीवा,मध्यप्रदेश से उषा जी एक कजली गीत गा रही है, गीत में एक सखी दूसरी सखी से कह रही है कि यही पर कजली खेल ले नहीं तो ससुराल में खेलना मुश्किल हो जाएगा :
कजली खेलेले जनक दुलारी,नईहर दुलम होइहैं न
दुइ सखिया मिल जेमना बनायो,जेमले सखिया जेमना
नईहर दुलम होइहैं न...
दुइ रे सखिया जल भर लायौ,घुटले सखिया
नईहर दुलम होइहैं न...
दुइ रे सखिया मिल फूला बिन लायो,सुतले फुलवा मोरे सखिया
नईहर दुलम होइहैं न...
कजली खेलेले जनक दुलारी,नईहर दुलम होइहैं न

Posted on: Aug 13, 2014. Tags: SONG Usha Yadav VICTIMS REGISTER

माँ से बढ़कर कोई तस्वीर नहीं होती है...एक कविता

चंद्रप्रकाश यादव दिल्ली से माँ पर एक कविता सुना रहे हैं :
मेरा मानना है कि दास्ताँ से बड़ी कोई जंजीर नहीं होती है
जिगर से बढ़कर कोई तीर नहीं होती है
कोई रहेमान हो सुल्तान या भगवान कोई
माँ से बढ़कर कोई तस्वीर नहीं होती है
जब आँख खुली तो अम्मा की गोद का सहारा था
उसका नन्हा सा आंचल मुझे भूमंडल से प्यारा था
उसके चहरे की झलक देख चेहरा फूलों सा खिलता था
उसकी आंचल की एक बूँद से मुझे जीवन मिलता था
मैं उसका राजा बेटा था वो आँख का तारा कहती थी
मैं बनूँ बुढ़ापे में उसका एक सहारा कहती थी
उंगली को पकड़कर चलाया था पढने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानगी को भी बीच अंतर में सहेजा था
मेरे सारे प्रश्नों का वो फ़ौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के कांटे चुन वो खुद गुलाब बन जाती थी
उसने क्या-क्या बुरी नज़र से बचाने के लिए
माथे पर सदा काला टीका लगाया था
माँ जैसी देवी जो घर में नहीं रह सकती
वो लाख पुन्य भले कर ले
इंसान नहीं बन सकते
माँ जिसको भी जल दे-दे वो पौधा सुन्दर बन जाता है,
माँ के चरणों को छूकर पानी गंगा जल बन जाता है,
माँ के चरणों में जन्नत है गिरिजाघर और शिवाला है
दुनिया में जितनी भी खुशबु है वो माँ के आँचल से आई है
माँ कबीरा की साखी जैसी माँ तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली,खुसरो की अमर रुबाई है
माँ आंगन की तुलसी जैसी,पावन बरगद की छाया है
माँ मानसरोवर की ममता माँ गोवर्धन की छाई है,
माँ परिवारों का संगम है माँ रिश्तों की गहराई है
माँ हरी दूब है धरती की,माँ केसर वाली क्यारी है
माँ की उपमा केवल माँ है,माँ हर घर की फुलवारी है
सातों स्वर नृत्य करते हैं जब कोई माँ लोरी गाती है
माँ जिस रोटी को छू लेती है वो प्रसाद बन जाता है

Posted on: Aug 12, 2014. Tags: Chandraprakash Yadav SONG VICTIMS REGISTER

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