माँ ने मुझको ममता दी, पिता ने दिया प्यार...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
माँ ने मुझको ममता दी, पिता ने दिया प्यार-
बहन राखी बांध दी, लुटाई अपना निश्छल प्यार-
भूल गया मै अपना सब कुछ-
पा अपनो का प्रेम प्यार-
दुनिया को मै भूल चला फीका-फीका लगा संसार...

Posted on: May 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

Impact : हमारे गांव में बिजली की समस्या थी, संदेश रिकॉर्ड करने के बाद समस्या हल हो गई-

ग्राम पंचायत-कांदावानी, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से मोहनलाल बता रहे हैं| उनके गांव में 3 महीने से बिजली की समस्या थी| उन्होंने अपनी समस्या को सीजीनेट के रिकॉर्ड कराया था| उसके बाद बिजली की समस्या हल हो गयी| इसलिये वे सीजीनेट के साथियों और संबंधित अधिकारियों को धन्यवाद दे रहे हैं : संपर्क नंबर@8964973228.

Posted on: May 10, 2019. Tags: CG ELECTRICITY IMPACT STORY MOHANLAL SONG VICTIMS REGISTER

जग में सुंदर है दो नाम, मात पिता और उनका धाम...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
जग में सुंदर है दो नाम, मात पिता और उनका धाम-
एक जन्म देती सब दुःख सहकर-
दूजा पालता अपना ख़ून पसीना सींच कर-
उनसे बढ़ कर नहीं कोई दूजा-
मात पिता की सेवा ही पूजा-
मात पिता को जो धुत्कारे, उससे बड़ा कोई नहीं हत्यारे...

Posted on: May 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
झूम रही थी डाली के संग, होकर मस्त मतवाली-
तान दे रहा था सुर मिलाकर उड़ इस डाली से उस डाली-
कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
दूर देश से आई थी एक महुआ आमा की खुशियाली-
चहक रही थी इधर उधर हवा के संग-संग...

Posted on: May 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

हंसी गयी, खुशी गया, गया मन का उमंग...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
हंसी गयी, खुशी गया, गया मन का उमंग-
देख बुढ़ापा की परछाई, मन का गया ठसन-
आया याद ऊस दिन का, जब था वो यंग-
खूब इतराया जग में, अपने बल बाजू के संग-
नहीं डरा नहीं झुका चलता रहा वो निडर-
देख बुढ़ापा की परछाई, होने लगा कुछ-कुछ डर...

Posted on: May 09, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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