हंसी गयी, खुशी गया, गया मन का उमंग...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
हंसी गयी, खुशी गया, गया मन का उमंग-
देख बुढ़ापा की परछाई, मन का गया ठसन-
आया याद ऊस दिन का, जब था वो यंग-
खूब इतराया जग में, अपने बल बाजू के संग-
नहीं डरा नहीं झुका चलता रहा वो निडर-
देख बुढ़ापा की परछाई, होने लगा कुछ-कुछ डर...
