ये जिन्दगी एक रेल है... बाल दिवस के अवसर पर एक कविता

कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई बाल दिवस के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
हर इंसान एक नादान !
ये जिन्दगी इक रेल है, जहां मौज ही मौज और बैर ही शैर है-
हलकी सी मुस्कान पर सारा जहां ढेर है-
तो फिर किस बात की देर है-
चलो नाच ही नाच और शोर ही शोर है-
ये जिन्दगी इक रेल है, जहां हर घड़ी खेल ही खेल है-
भोली सूरत और आंखें शैतान, फिर भी दिल है नादान-
बस एक ही तो अरमां है, बच्चों सा ही क्यों ना हर एक इंसान नादान हो...

Posted on: Nov 15, 2015. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER

'प्रताप' का वों शार्थी, जो गली-गली क्रांति के शब्द बुनता...कविता

कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई गणेश शंकर विद्यार्थी के 136 वीं जयंती के अवसर पर उनकी स्मृति व अवदानों के सन्दर्भ में कविता प्रस्तुत कर रहे हैं :
‘प्रताप’ का वों शार्थी, जो गली-गली क्रांति के शब्द बुनता-
लहू के रंग के बीच एकता और उमीद के बीज चुनता-
निडर और निर्भीक होकर जो गुलामी के बंधन तोड़ता-
अल्फाजों की तलवार से जिसने अंग्रेजों की करी खूब खिंचाई-
उस वीर क्रन्तिकारी को याद करने की बारी है आई-
तेरे लिए देश के कोने-कोने से सलाम है भाई...

Posted on: Oct 27, 2015. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER

बिसहाड़ा की आग में सुलगता भारत...दादरी हत्याकांड पर कविता

कानपुर, उत्तरप्रदेश से के एम भाई दादरी हत्याकांड पर कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
बिसहाड़ा की आग में सुलगता भारत-
सुवारांस और मुर्गांस के भक्षक, आज गोमांस पर विचलित हैं-
सहिष्णुता और अखंडता की दुहाई दे रहे हैं-
उन्हें डर है-
कहीं बकरांस उनके भक्षण का हरण न कर ले-
सत्ता के तिलचट्टे भी बड़े पशोपेश में हैं-
उन्हें फ़िक्र है, कहीं गोमांस और बकरांस, सर्वांस का वरण न कर ले-
लोकतंत्र आज बेहद प्रसन्न है-
यह सोचकर, कहीं धर्मनिर्पेक्षता-
मोक्ष की शरण ना कर ले...

Posted on: Oct 10, 2015. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER

भगत सिंह मरता नहीं हिन्दुस्तानी घरानों से...कविता

कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम.भाई शहीद भगत सिंह की 108 जयंती के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं.
भगत सिंह मरता नहीं हिन्दुस्तानी घरानों से-
क्रान्ति की शोक लहरों पे, विचारों के डूबते समुन्दर में-
भगत सिंह की यादें जिंदा हैं हर एक पतवार पे-
लहू का रंग बदलता नहीं जुल्मों से हौसला टूटता नहीं-
भगत सिंह भुलाए भूलता नहीं इंकलाबी विचारों से-
तुम समझो या ना समझो, बलिदानों का रंग रिश्तों से भी ज्यादा गहरा होता है-
हर एक जमाने में, लाख सदियाँ बीत जाएं-
क्रांति की नई इबारतें लिख जाएं-
पर भगत सिंह मरता नहीं हिन्दुस्तानी घरानों से...

Posted on: Sep 29, 2015. Tags: KM Bhai SONG VICTIMS REGISTER

बाटला हाउस की दीवारें इन्साफ की मांग करती हैं...कविता

कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई बाटला हाउस काण्ड के सन्दर्भ में एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं :
बाटला हाउस की दीवारें इन्साफ की मांग करती हैं-
खाकी रंग इमानदारी बयां नहीं करता-
चमड़ी का रंग अपराध बयां नहीं करता-
तेरा हिन्दू होना और मेरा मुस्लिम होना-
शक की बुनियाद बयां नहीं करता-
चार दिवारी में रहना-
साजिश का तयखाना बयां नहीं करता-
धमाके की आवाज आतंकवाद बयाँ नहीं करता-
हथियार रखना आतंकवादी होना बयाँ नहीं करता-
किसी को भी मार देना वीरता बयां नहीं करता-
हर वर्दीधारी का मरना शहादत बयां नहीं करता-
कोर्ट का हर निर्णय इन्साफ बयां नहीं करता-
हुकूमत का तानाशाही रंग लोकतंत्र बयां नहीं करता-
सुन ले ए ताजे वर्तानिया-
बाटला की दीवारें इन्साफ की मांग कर रही हैं...

Posted on: Sep 19, 2015. Tags: KM Bhai SONG VICTIMS REGISTER

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