बाटला हाउस की दीवारें इन्साफ की मांग करती हैं...कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई बाटला हाउस काण्ड के सन्दर्भ में एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं :
बाटला हाउस की दीवारें इन्साफ की मांग करती हैं-
खाकी रंग इमानदारी बयां नहीं करता-
चमड़ी का रंग अपराध बयां नहीं करता-
तेरा हिन्दू होना और मेरा मुस्लिम होना-
शक की बुनियाद बयां नहीं करता-
चार दिवारी में रहना-
साजिश का तयखाना बयां नहीं करता-
धमाके की आवाज आतंकवाद बयाँ नहीं करता-
हथियार रखना आतंकवादी होना बयाँ नहीं करता-
किसी को भी मार देना वीरता बयां नहीं करता-
हर वर्दीधारी का मरना शहादत बयां नहीं करता-
कोर्ट का हर निर्णय इन्साफ बयां नहीं करता-
हुकूमत का तानाशाही रंग लोकतंत्र बयां नहीं करता-
सुन ले ए ताजे वर्तानिया-
बाटला की दीवारें इन्साफ की मांग कर रही हैं...
