पलंग चढ़े त डर लागै हो रामा पायल बाजे...मैथिली चइतावर श्रृंगार गीत
मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार मैथिली भाषा में चइतावर श्रृंगार गीत सुना रहे हैं:
पलंग चढ़े त डर लागै हो रामा पायल बाजे-
धीरे-धीरे चढ़ल हो पलंग पर पलंग पर हो पलंग पर-
सुतल पिया नहीं जागै हो रामा पायल बाजे-
नुपुर दाबि चलू सब सखिया-
तनिक भनक नहीं लागै हो रामा पायल बाजे-
लाख जगाए पिया नहीं जागै-
बिरहा मोहिं सताए हो रामा पायल बाजे-
पलंग चढ़े त डर लागै हो रामा पायल बाजे...
Posted on: Apr 09, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
एक बजे ना दो बजे ना तीन बजे आ जाबो...छत्तीसगढ़ी प्रेम गीत
सुनील कुमार मुज़फ्फरपुर, बिहार से एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
एक बजे ना दो बजे ना तीन बजे आ जाबो-
ए ओ मा फूल कहीं ना तोर से मोला मया लागे-
जब ले देखी हूं तोला तू त तोर मोला हाथ है-
जियरा में त समा गे वहाँ आ गए-
सोचला जानत ह तेहा मोला का बरसात है-
पहली प्यार है पहली बार है दिल मेरा धुक-धुकात है-
ए ओ मा फूल कहीं ना तोर से मोला मया लागे...
Posted on: Apr 07, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
दू महीना के छुट्टी ले ला मानि ला तू बतिया...भोजपुरी में चुनावी गीत
मालीघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार भोजपुरी में एक चुनावी गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
दू महीना के छुट्टी ले ला मानि ला तू बतिया-
ए छत्तीसगढ़िया पिया बिहार में होला पंचायत चुनविया-
ए छत्तीसगढ़िया पिया-
अइबा ना त परचा छपाई हो-
ठण्डल बिल कलेंडर के आर्डर कहां दियाई-
रेडियो में दीदी अनीता के सुनत बाटे बरनमिया-
ए छत्तीसगढ़िया पिया बिहार में होला पंचायत चुनविया...
Posted on: Apr 05, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
चइत मासे चुनरी रंगा द हो रामा चइत मासे...चैती गीत
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से एक चैती गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
चइत मासे चुनरी रंगा द हो रामा चइत मासे-
चुनरी रंगा द सइयां कोटवा लगा द-
आरी-आरी घुँघरू लगा द हो रामा चइत मासे-
काली-काली केशिया में मोतिया लगा द-
अपने ही हाथों से हमरा सजा द-
अपने ही हाथों सजा द हो रामा चइत मासे-
झुलनी गढ़ा द सइयां टिकवा गढ़ा द-
पटना शहरिया घुमा द हो रामा चइत मासे....
Posted on: Apr 01, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
रुके नहीं पतवार मांझी ओ रुके नहीं पतवार....मांझी गीत
मालीघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
रुके नहीं पतवार मांझी ओ रुके नहीं पतवार-
बाढ़ भयंकर आई है घटा अभी भी छाई है-
तट पर भीड़ अपार रुके नहीं पतवार-
सब जाने अनजानों को अपने और विरानों को-
पहुंचा दो उस पार रुके नहीं पतवार-
तुममें साहस है बल है शक्ति प्राण का संबल है-
क्यों होगी फिर हार रुके नहीं पतवार-
साहस है बल है श्रम है हमको फिर किसका गम है-
पथ देगी खुद धार रुके नहीं पतवार.....
