गाम के आधिकारी तोहे बड़का भैया हो...सामा चकवा गीत
मालीघाट,जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक पारम्परिक सामा चकवा लोक गीत सुना रहे है जिसमें गाँव के अधिकारी से गांव में तालाब खुदवाने का अनुरोध किया जा रहा है, सामान्यत: यह गीत गांव की महिलाओं के द्वारा गाया जाता है :
गाम के आधिकारी तोहे बड़का भैया हो, तोहे बड़का भैया हो-
ओ भैया दस पांच पोखरा खोनाई दिह चंपा फूल लगाई दिह हो-
भैया लोभएल भौजी हार गुथु हे-
आहे सेहो हार पहिर बड़की बहिनी-
साम चकेबा खेलत हे...
Posted on: Nov 05, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
वन्य पशुओं द्वारा जान हानि, घायल होने, फसल या घर को नुकसान होने पर मुआवजे का प्रावधान है...
सुनील कुमार शासकीय वनविभाग रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ द्वारा मिलने वाले मुवावजा के सम्बन्ध में लागू योजना के बारे में बता रहे है | अगर किसी भी प्रकार की जनहानि होती है तो इस नयी जानकारी के अनुसार ४ लाख तक मुवावजा देने का प्रावधान है, तुरंत सहायता २५ हज़ार, अपंग होने पर २ लाख मिलता है | वन्य पशु के द्वारा फसलों को किसी प्रकार की हानि पहुचाया जाता है, तो उसके लिए भी ९ हज़ार प्रति एकड़ और ९५,००० घर के लिए मुवावजा की व्यवस्था लागू है, पहाड़ी क्षेत्र के लिए यह मदद अधिक है |यह जानकारी छत्तीसगढ़ राज्य जिला रायगढ़ के प्रशासनिक अधिकारियो द्वारा जारी किया गया है अधिक निःशुल्क जानकारी के लिए सम्पर्क करे 18002332631। सुनील कुमार@9308342087
Posted on: Nov 04, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
साथी के रान नईया रे मलाहा साथी ये सारे या...पारम्पारिक गीत
ग्राम पचायत-सुमेरा, प्रखंड-कुरेनी, जिला-मुजफ्फपरपुर (बिहार) से भोली देवी एक गीत सुना रही है:
साथी के रान नईया रे मलाहा साथी ये सारे या-
साथी एरा गानिया रे माला तोहर नायिये मासलिया-
सोनेकेरा नायिया ओ दिना नारे के सारे के सारेहा...
Posted on: Nov 03, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
जंगल का जब इतिहास लिखा जाएगा तो मेरा नाम आग बुझाने वालों में लिखा जाएगा: चिड़िया की कहानी
बहुत समय पहले की बात है भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के इलाको में ऋषि वाल्मीकि रहां करते थे वो लोगों को ज्ञान की बातें बताया करते थे । उनके शिष्यों के साथ-साथ एक छोटी चिड़िया भी उनके बात को बहुत ही ध्यानपूर्वक सुना करती थी एक बार की बात है की जंगल में आग लग गई और उसको देखकरमनुष्य के साथ साथ जीव जन्तु भी परेशान थे वो इधर उधर भाग रहे थे कुछ समझ में नही आ रहा था पास में नदी भी नही तालाब भी नही था उसके बावजूद एक छोटी चिड़िया दूर से अपने चोंच में पानी भर के लाती और आग पर छिड़कती यह देखकर मनुष्य और पशु ने छोटी चिड़ियाँ से कहा इस भयंकर आग तुम्हारी चोंच से लाया पानी से बुझ जायेगा ? छोटी चिड़ियाँ ने मनुष्य तथा पशु से बड़े विनम्रता पूर्वक कहा किमैं जानता हूं मेरे प्रयास से यह भयंकर आग नहीं बुझेगा परंतु जंगल का जब इतिहास लिखा जाएगा उस वक्त मेरा देखने वालो में नहीं बल्कि बुझाने वाला में होगा. सुनील@9308571702
Posted on: Nov 01, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कुम्हार के घर से खेतो में जाती थी...दीपावली में कुम्हार पर कविता
मालीघाट, जिला- मुज्जफरपुर,राज्य बिहार से सुनील कुमार दीपावली के अवसर पर कुम्हार भाइयों पर आधारित चित्रा देसाई की एक कविता सुना रहे है :
कुम्हार के घर से खेतो में जाती थी, चाक्ष परख मिटी-
हाथो में लपेटे गोल गोल घुमाती थी हमेशा एक सवाल-
सुराही मटके दिये, मिट्टी बनाती है ये हाथ-
नानी की वही हँसी और साफ जवाब-
न मिट्टी न हाथ, आग बनाती है सब-
सिंकती है मिट्टी तब ही तो बनती है-
वरना मिट्टी में घुली रहती जिसे आग परिपक्व बनाती है...

