उषा जी बिहार से बिहारी गीत सुना रही हैं....बिहार गीत

जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार)से उषा किरण एक स्वलिखित
बिहार गीत सुना रहे हैं :
ये बिहार है इसके कण-कण में संस्कार भरा है-
गौरवशाली इसने एक अपना इतिहास रचा है-
ऋषि मुनि की तपो भूमि यह देवो की है कर्म भूमि-
इसी बिहार ने जन्म दिया कितने साधक विद्वान् गुनी-
माँ सीता की जन्म स्थली सीता मडी बिहार है-
मंदिर मस्जिद की स्थली यहाँ जंगल खेत पहाड़ है-
ये बिहार है इसके कण-कण में संस्कार भरा है...

Posted on: Feb 15, 2019. Tags: USHA KIRAN

कतेक पानी बहई मईया गंगा महारानी हे कतेक पानी...गंगा गीत

पक्की सराय, सोगरा स्टेट, मुजफ्फरपुर बिहार की संस्कृतिकर्मी उषा किरण गंगा गीत सुना रही हैं:
कतेक पानी बहई मईया गंगा महारानी हे कतेक पानी-
मईया बहलई बलान हे कतेक पानी-
आगम पानी बहई मईया गंगा महारानी हे छातीय पानी-
कथी ला ए बोधबई मईया गंगा महारानी मैया कथी ला हे-
मैया बोधबई पलान हे के ही धरी-
कर जोरी बोधबई मईया मैया गंगा महारानी ठेहीहा धरी-
मैया बोधबई पलान हे ठेहिहा धरी...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: USHA KIRAN

हाय- हाय केही जैते हाजीपुर के ही जैते पटना... झरनी गीत

बिहार में मुसलमान समुदाय द्वारा ताजिया उत्सव के समय बांस का झाड़ू बनाकर साथ में नाच और गाना करते हैं इस गीत को झरनी गीत कहते है | उषा किरण पक्की सराय, मुजफ्फरपुर (बिहार) से एक झरनी गीत सुना रही हैं :
हाय- हाय केही जैते हाजीपुर के ही जैते पटना-
केही जैते बेतिया लड़न को हाय- हाय-
हाय- हाय बाबा जैते हाजीपुर भैया जैते पटना-
स्वामी जैते बेतिया लड़न को हाय -हाय-
हाय- हाय केही लएतै झिलमिल सड़ियां के ही-
लएतै कंगना,केही रे लएतै सिर के सिंदूरबे हाय हाय-
हाय- हाय बाबा लैएतै झिलमिल सड़ियां-
भईया लऐतै कंगनास्वामी लैते सिर के सिंदूरबे हाय हाय-
हाय- हाय फाटी जैते झिलमिल सीरिया टूटी जैएतै कंगना-
रह जैतई सिर के सिंदूरबे हाय -हाय...

Posted on: Jul 07, 2017. Tags: USHA KIRAN

हाय हाय दाहा देखे गेलीअई ,मकईया तोड़ी लेलीअई...झरनी गीत

मुस्लिम समुदाय द्वारा ताजिया निकालने के समय गाया जाने वाला सामूहिक झरनी गीत उषाकिरण जी पक्कीसराय जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुना रही हैं:
हाय हाय दाहा देखे गेलीअई ,मकईया तोड़ी लेलीअई-
धईये लेलई राजा के सिपहीये हाय हाय-
हाय -हाय छोड़ी दहु आहे राजा हमरो अंचरवां-
रोअत होईहे गोदी के बलकवा हाय हाय-
हाय -हाय अब ही त हऊ गे छौड़ी बारह बरिसवा-
कहाँ से लएले गोदी के बलकवा हाय हाय-
हाय -हाय बारह बरिस बाबा कैलक बिअहवा-
ओही से लएली गोदी के बलकवा हाय-हाय...

Posted on: Nov 27, 2016. Tags: USHA KIRAN

माथे की बिंदी हैं हिंदी: हिंदी दिवस के अवसर पर रचना...

उषा किरण विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर एक रचना सुना रही है:
हिंदी ह्रदय की धड़कन हैं, काया है हिन्दुस्तान का-
माथ के बिंदी हैं हिंदी, भाषाओं के श्रृंगार का-
कण-कण में माधुर्य है अविरल हिंदी के रसधार का-
मीठी किलकारी हैं हिंदी, हिमालय के प्राण का...

Posted on: Sep 14, 2016. Tags: USHA KIRAN

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