अमरकंटक से मेरा उद्भव मंडला में विस्तार मिला...नर्मदा जयंती पर कविता

जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से राकेश नर्मदा
जयंती के उपलक्ष में एक कविता सुना रहे है:
अमरकंटक से मेरा उद्भव-
मंडला में विस्तार मिला-
भेड़ाघाट में सिमटी मैं फिर-
नेमावर में ठहराव मिला-
आगे बढ़ी “सहस्त्रधारा” में-
औंकारेश्वर में उमड़ पड़ी-
महेश्वर से धीरे-धीरे-
सागर से मिलने चली-
‘कंकड़ को शंकर’ करती मैं-
पूरब से पश्चिम बही-
मेरे तट बनें तीर्थाटन-
कथाएँ कई अनकही-
माना मुझे माँ जब तुमने-
क्यों मर्यादा को पार किया-
जगह-जगह से देह को भेदा-
आँचल क्यों तार-तार किया-
नहीं चाहती मैं कुछ तुमसे-
बस मेरी पुकार सुनों-
मेरे जल को करके गंदा-
सपने सुनहरे मत बुनों-
मैं हूँ तुम्हारी जीवन रेखा-
मुझको मेरा मान दो-
एक निर्मल ,पवित्र रेवा की-
फिर मुझे पहचान दो...

Posted on: Feb 04, 2017. Tags: RAKESH BADWANI

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