ओ तेरी मेहनतें की कश्ती, कमाल है...

मिथिलेश कुमार मरावी एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं. गीत में मेहनकश मजदूरों के परिश्रम और परिणाम की तरफ संकेत किया जा रहा है :
ओ तेरी मेहनतें की कश्ती, कमाल है
लड़का-बच्चा-नाती-पाती, सब रे! ऐ बेहाल है
ठन्डे जोड़ वर्ष से कि, अन्न तै उगाए
और उस अन्न को
बेच देई माटी के माल है
लड़का-बच्चा-नाती-पाती...
सड़क-रोड़-रेलपाथ, तैने ही बिछाए
कभौं तोर आवाजाही मा, सीट तक न पाए
ओ तेरी मेहनतें की कश्ती, कमाल है
लड़का-बच्चा-नाती-पंती, सब रे ! ऐ बेहाल है

Posted on: Oct 31, 2014. Tags: Mithilesh Kumar Maravi

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