जीत लिया है मृत्यु को मैंने...बेटी बचाओ आन्दोलन के सन्दर्भ में एक कविता

ग्राम-चिरगांव, जिला-झाँसी, उत्तरप्रदेश से डॉ जितेन्द्र कुमार गुप्त बेटी बचाओ आन्दोलन के सन्दर्भ में एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
जीत लिया है मृत्यु को मैंने-
काल-चक्र को बता धता-
मै यौवन से बचपन में आ गया-
पायी ऐसी अमरता-
दो नन्ही परियों ने घर मेरे आकर-
ऐसी बिखेरी सुन्दरता-
जिसको देखकर चकित रह गया-
इस जग का कर्ता-धर्ता-
अब फिर से मै बड़ा होऊंगा-
खेल-खेल चौबारे में-
फिर तितली के संग उडूँगा-
मस्त बसंत बयारों में-
फिर मांगूंगा चन्द्र की कंदुक-
लात मार गुब्बारों में-
फिर कोयल की नकल करूँगा-
बागों और बहारों में-
ऐसी अमरता कहा धरी-
फिरते तो सब हैं पाने को-
बेटी से माँ, माँ से मानव-
है और क्या कहने-कहाने को-
तुम भी मेरे संग चलो-
बचपन का साथ निभाने को-
नन्हा हो मेरा मन मचला-
परी लोक में जाने को-
मैंने तुम संग प्रीत लगाकर-
जाना इस अफसाने को-
कि क्यों ईश्वर लालायित रहता-
माँ की गोद में आने को-
मानव जीवन पाने को-

Posted on: Feb 04, 2015. Tags: JITENDRA KUMAR GUPTA

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download