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चउ मास के पानी परागे जाना माना...छत्तीसगढ़ी कविता-

ग्राम-मेढारी, पोस्ट-करमडीहा, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से अंजली नेटी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहें हैं :
चऊ माँ के पानी परागे जाना माना-
अब आकाश हर चाउर सहित छारगे-
जग-जग ले अब चंदा उगथे बदल भईगे भरीहर-
पृथ्वी माता चारों खुट ले दिखथे हरियर-हरियर-
रीग बिग ले अब अन्पुन नाहर खेतन खेत माँ छागे – नदिया अऊ तरिया के पानी कमती होये लगिश...

Posted on: Feb 03, 2018. Tags: ANJLI-NETI

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