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हे किताब पर इतनी मोटी जितनी होय पराठा रोटी...कविता

ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू, झारखण्ड से अकलेश कुशवाह एक कविता सुना रहे हैं:
हे किताब पर इतनी मोटी जितनी होय पराठा रोटी-
पढने पर तब हो हल्ला भूल जायेंगे खाना रसगुला-
बढ़ पढ़कर पाए सभी किताब पापा लिख दो ऐसी किताब-
नयी-नयी हो उसमे बात पढने लगे सभी दिन रात-

Posted on: Dec 14, 2016. Tags: AKHLESH KUSHVAH

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