खेत के कर्पा खेत परे है बिहारी परे है धान...किसानी गीत -
ग्राम-अस्त्रा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से तिलकलाल कुलदीप एक किसानी गीत सुना रहे है:
खेत के कर्पा खेत परे है बिहारी परे है धान-
मुहं में कवरा देखे काबर झिक डरे भगवान-
एक तो चार महिना के जुहा मारे किसानी-
एकरे भरोसा कर्तन हमन घर के जम्मो सियानी-
सावन बादो सुक्का पाका अग्गन पूस में पानी...

