काली उखेतर खेड़े रे, मोआसुनूँ भीलडू...भीली कृषि गीत

देवास मध्यप्रदेश के दमासीन के काकड़ मोहल्ले से सिकदार लहरे एक गीत सुना रहे हैं। गीत बारेला समाज के लोकपरम्परा से सम्बंधित है। आदिवासी लोग जब जमीन तैयार करके ज्वार-बाजरे की खेती करते हैं या नए धान का पूजन करते हैं तब बहन -बेटियां मिलकर ये गीत गाती हैं :
काली उखेतर खेड़े रे, मोआसुनूँ भीलडू
खेड़ी-खेड़ी ने रसबायु रे, मोआसुनूँ भीलडू
वाई झुआर उगबाजे रे, मोआसुनूँ भीलडू
बाजेरे कूड़पण आयो रे, मोआसुनूँ भीलडू
बाजेरे नींदडू आयो रे, मोआसुनूँ भीलडू

Posted on: Sep 05, 2014. Tags: SONG Sikdar Lahre VICTIMS REGISTER

सीमड़े ढोलकि बाजे लिव, हे री टान्डो लेरियो...बारेला गीत

सिकदार लहरे ग्राम खेड़ाखाल, तहसील वागली, जिला देवास, मध्यप्रदेश से बारेला भाषा में एक गीत रिकॉर्ड कर रहे हैं ये गीत तब गया जाता है, जब शादी हेतु लडकी को देखने जाते हैं :
सीमड़े ढोलकि बाजे लिव हे री टान्डो लेरियो
जुवानि न देखण देखाडेव हे री टान्डो लेरियो-2
जुआ नैनी राजी तू छाडेव हे री टान्डो लेरियो
जुआ नैनी मांगण जोड़ावो, हे री टान्डो लेरियो
सीमड़े ढोलकि बाजे लिव, हे री टान्डो लेरियो
जुआ नैनी राजी तू छाडेव, हे री टान्डो लेरियो
सीमड़े ढोलाकि बाजे लिव, हे री टान्डो लेरियो

Posted on: Jul 01, 2014. Tags: SONG Sikdar Lahre VICTIMS REGISTER