हिन्द देश के निवासी, सभी जन एक हैं..गीत
नमस्कार साथियों मैं सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से आपको एक गीत सुनाना चाहता हूँ:
हिन्द देश के निवासी,
सभी जन एक हैं,
रंग रूप भेष भाषा चाहे अनेक हैं,
कोयल की कूक हारी,
पपीहे की पेर न्यारी,
गा रहे तराना बुलबुल, राग मगर एक है..
Posted on: Nov 02, 2024. Tags: Suresh Song
बेला फूले अभिराज कि माला किसके गले डालूँ.. गीत
नमस्कार साथियों मैं सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से आपको एक गीत सुनाना चाहता हूँ:
बेला फूले अभिराज
कि माला किसके गले डालूँ
राम गले डालूँ कि सीता गले डालूँ
सीता जी के लंबे लंबे बाल
कि माला किसके गले डालूँ..
कृष्ण गले डालूँ कि राधा गले डालूँ
वो तो रचाए रास कि माला किसके गले डालूँ..
Posted on: Nov 02, 2024. Tags: Suresh Kumar Song
शक्ति साधना बिना न बनता बिगड़ा कोई काम...गीत
नमस्कार साथियों मैं सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से आपको एक गीत सुनाना चाहता हूँ:
शक्ति साधना बिना न बनता बिगड़ा कोई काम
नारी तुम हो शक्ति राष्ट्र की शत शत तुम्हें प्रणाम
महादेव शिव ने जग हित में आदि शक्ति को साधा
बने अर्ध नारीश्वर इसमे रूप तुम्हारा आधा
देवों को जब जब असुरों ने छेड़ा और सताया
तब देवों को भी विपदा मे ध्यान तुम्हारा आया...
Posted on: Oct 27, 2024. Tags: Suresh Kumar Song
उठो सुनो प्राची से उगते सूरज की आवाज, अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज...
मैं सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से आपको एक गीत सुनाना चाहता हूँ:
उठो सुनो प्राची से उगते सूरज की आवाज
अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज
देश की जिसने सबसे पहले जीवन ज्योति जलाई
और ज्ञान की किरणें सारी दुनिया में फैलाई
अगणित बार बचाई जिसने
मानवता की लाज
अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज...
Posted on: Oct 26, 2024. Tags: Suresh Kumar Badwani Song
एक नगर में दो आदिवासी बालक की कहानी...
(मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार बड़वानी कहानी सुना रहे है |
एक नगर में दो आदिवासी बालक रहते थे |उन दो की बड़ी गहरी मित्रता थी | उन दोनों के नाम छोटू और अर्जुन थे |और उनके गाँव में सुंदर काका नामक व्यक्ति रहता था |सुंदर काका के बगीचे में बहुत सारे आम के पेड़ थे |छोटू और मोटू रोज वहां से गुजरते थे लेकिन आम तोड़ने का साहस नहीं होता था |एक दिन अर्जुन ने छोटू को कहा आज सुंदर काका नहीं है, आम खाने का बड़ा अच्छा मौका है |वे दोनों बगीचे पेड़ में गए और आम के पेड़ को पत्थर मारे, पत्थर पेड़ के नीचे खड़े सुंदर काका के सर में लग गया| और वे दोनों भागने लगे लेकिन रखवाले ने उन दोनों को पकड़ लिया और सुंदर काका के पास ले गए |दोनों बहुत डरे हुए थे | रखवाले ने कहा आज्ञा हो तो इन दोनों के हड्डी पसली तोड़ दू |सुंदर काका बोले इन दोनों का मन आम खाने का था, इन्हें मरने का नहीं |गलती से मुझे पत्थर लग गया तो दोनों का क्या दोष, छोड़ दो |बोले बेटा जब भी आम खाने का मन करे तो आम खाने आ जाना | इस घटना के बाद कभी भी छोटू और मोटू चोरी के आम नहीं खाते थे| जब भी मन होता सुंदर काका से मांग लेते थे |
