बेढू पाखो बारमासा हो, ओ नारायण पाखो पाखो चेता मेरी छैला...उत्तराखंडी कुमावनी लोकगीत
अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली, से संजना उत्तराखंडी कुमावनी भाषा में एक लोकगीत सुना रहे है:
बेढू पाखो बारमासा हो, ओ नारायण पाखो पाखो चेता मेरी छैला-
रुना भुना दिन आया, ओ नारायण पूजूँ मेरू मैंता मेरी छैला-
अल्मोड़ा की नन्दादेवी, ओं नारायण फूल चढोनी पाती मेरी छैला-
अल्मोड़ा का लाल बज़ारा, ओं नारायण लाल माटी की सिदणी मेरी छैला-
चार कुटी को कान भूढ़ो, ओं नारायण नील कुटी की पीड़ा मेरी छैला...
