पीड़ितों का रजिस्टर : नक्सलीयों का काम नहीं करेंगे तो मारे जाएंगे...
ग्राम पंचायत-तोयेनार, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से रूपसाय सलाम बताते हैं की उन्होंने 3-4 साल नक्सलियों के लिए काम किया, लेकिन वर्त्तमान में उन्हीं के द्वारा मारे जाने के भय से पिछले 8-9 साल से शांतिनगर में रह रहे हैं। उनका पैतृक गाँव तोयनार है, जहाँ उनके घर को नक्सली हथियार व गोला-बारूद रखने के लिए इस्तेमाल किया करते थे। फिर दूसरी टुकड़ी आकर उसे ले जाती थी। वे नक्सलियों के लिए चावल, सब्जी वगैरह भी इकठ्ठा करते थे। वे कहते हैं कि वे नक्सलियों के लिए काम करने को मजबूर थे क्यूंकि अगर वे काम करने से इंकार करते, तो उन्हें मार दिया जाता। एक बार उनका किसी काम से शांतिनगर जाना हुआ जहाँ पे पुलिस को खबर मिलते ही उन्हें पकड़ लिया गया। वे उन्हें उनके गाँव ले गए व उन्हें बाध्य कर सारा असला-बारूद दिखाने को कहा। उसे जब्त कर पुलिस उन्हें भी अपने साथ वापस ले आयी। उन्हें कहा गया कि वापस जाना खतरे से खली नहीं होगा और सहायता राशि के नाम पे रू.1000 दिए। तब से वे शांतिनगर में ही रह रहे हैं और मजदूरी कर के गुज़ारा चलाते हैं। संपर्क नंबर@9770727570.
