सरकार के मदद न करने के कारण स्थति न घर का ना घाट का हो गई: प्रथम सरेंडर्ड नक्सली बने सरपंच
प्रथम सरेंडर्ड नक्सली जो की सरपंच चुने गए, ग्राम पंचायत कलेपाल के बुरसुराम मंडावी अपने गाँव से 25 किमी दूर ग्राम पंचायत पखनार, तहसिल- दर्भा , जिला- बस्तर, छत्तीसगढ़ में रहते हैं। कारण है नक्सलियों द्वारा मारे जाने का भय। माओवादियों के जन मिलिशिया के सदस्य रहे बुरसू जी ने 2017 में आत्मसमर्पण किया था। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन्हें घर और नौकरी मिलनी चाहिए थी जिससे ये अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। नौकरी की आशा में उन्होंने 3 साल पुलिस के साथ मुफ़्त में काम किया। वे पुलिसवालों को ग़श्त लगाने में मदद करते थे। लेकिन इतने दिनों के बाद भी कोई लाभ ना मिलने पर वे उनका काम छोड़ कर राजनीति में आ गए और चुनाव जीता। लेकिन माओवादियों के खिलाफ पुलिस की मदद करने के कारण नक्सली उन्हें अपना दुशमन समझते हैं और संभवतः उन्हें मार देंगे। अब न तो वे अपने गाँव जा कर अपने जमीन पे खेती कर सकते हैं और न ही बिना किसी सहायता के मुख्यधारा में सामान्य रूप से अपना जीविकोपार्जन कर सकते हैं। वे कहते हैं उनकी और उनके जैसे ज्यादातर सरेंडर किए लोगों की स्थिति न घर का ना घाट का हो गई है। संपर्क नंबर- 7722954921
Posted on: Oct 26, 2021. Tags: BASTAR BURSURAM MANDAVI CG DARBHA KALEPAL MAOIST NAXAL VICTIM REGISTER
Impact :सीजीनेट में सन्देश रिकॉर्ड करने पश्चात् रोड बन गया...
ग्राम-पकनार, ब्लाक-दरभा, जिला-बस्तर छत्तीसगढ़ से सरपंच बुरसुराम मंडावी बता रहे है कि उनके पंचायत में रोड नहीं है पूरा गड्डा खोद दिए थे| इसलिए कलेपाल पंचायत जाने के लिए रोड नहीं थे| इसकी शिकायत कई बार उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को दिए लेकिन कोई सुनाई नही हुआ, तो ये साथी अपना सन्देश सीजीनेट में रिकॉर्ड करवाया और कुछ दिनों बाद उनके समस्या का समाधान हो गया वे सभी मददगार साथियों को धन्यवाद दे रहे हैं| संपर्क7722954921.(175142) GT
