एकता की कहानी: एक साथ रहने से कठिन से कठिन काम भी आसान हो जाते हैं
बहुत समय पहले की बात हैं एक मुहल्ले में रामकली और रूक्मिणी दो बहनें रहा करती थी .छोटी होने के बावजूद दोनों बहने समझदार और होशियार थी. एक बार की बात हैं एक सप्ताह तक लगातार मूसलाधार वर्षा होने के कारण जो ग्रामीण मुहल्ले मे जलावन के लिए लकड़ी लाया करते थे नहीं ला पाये जिस कारण घर में खाना बनाने के लिए जलावन समाप्त हो गये . रामकली की माँ ने रामकली के पापा से कहा घर के सारे जलावन समाप्त हो गये हैं अब खाना कैसे बनेगा ? रामलाल जी ने कहा की ठहरो में पास के गांव से जलावन लेकर आता हूं .रामलाल जी को जाने के बहुत देर बाद खाना बनने का इंतजार करते करते रक्मिणी और रामकली भी घुमने चली गई .घुमते घुमते वह रामबाग पहुंच गई .रामबाग मे रूक्मिणी और रामकली अपने आम के बगीचा में अक्सर खेलने जाया करते थे. दोनों बहनो ने देखा की बग़ीचा में आम की मोटी सुखी डाली आँधी के कारण गिरी हुई हैं दोनों बहनो ने सोचा की इसे उठा कर घर ले के चलते हैं परंतु दोनों बहन से
आम की डाली उठ नहीं पाई .रक्मिणी ने देखा कि बहुत सारी चीटियां एक मरे हुए मोटे लकड़ी के कीड़े को उठा कर ले जा रही थी .ऐसे में कभी-कभी बहुत सारी चीटियां दब भी जाया करती थी फिर दुसरी बहुत सारी चीटियां मरे हुए मोटे कीड़े को धक्का मार मार के अपनी चीटियों को बचाया करती थी .रूक्मिणी ने सोचा की हमारे दोस्त आ जाये तो आसानी से आम की सूखी मोटी डाली को घर ले जाया जा सकता हैं. फिर दोनों बहने ने सोचा की हम दोनों बहने यहाँ से अपने घर जायेंगे तो कोई दुसरे इस सूखी आम की डाली ले जा सकते हैं .रूक्मिणी ने रामकली को बगीचा में बिठाकर अपनेदोस्तों को बुलाने चली गई .सारे दोस्त बग़ीचा में आकर आम की सूखी मोटी
डाली को ले आए .इसे देखकर रूक्मिणी और रामलाल के पिता रामलाल बहुत खुश हुए .रामलाल जी ने सभी बच्चों को कठपुतली का खेल दिखाया और कठपुतली के माध्यम से बताया बच्चों मेल में बहुत बल हैं .कठिन से कठिन काम भी हम मिलजुलकर आसानी से कर सकते हैं .मिलकर रहनेसे कोई हानी भी नहीं पहुँचाता साथ ही आपस में मिलकर रहने से मन भी प्रसन्न रहता हैं.
Posted on: Oct 05, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पीली साड़ी, हाथ मेंहदी, बाजूबंद में आई थी...शहीद कविता
बिहार (गया) के बेटे शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी की “वीरांगना” पत्नी पर मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
पीली साड़ी, हाथ मेंहदी, बाजूबंद में आई थी-
वो भी क्या दिन थे ,सुहाग के आंगन में तरुणाई थी-
बड़ा स्वप्न था तेरे कंधे पर चढ पहुचूंगीं मैं श्मशान-
उठा लिया अपने कंधे पर, पर घाव नही तेरा वलिदान – मैं लाचार नहीं, नारी हूँ, भारत माँ की पोषिता-
मैं रणचंडी लक्ष्मीबाई, सावित्री सी योषिता-
ये मत सोचो तेरे प्यार के वो दिन अब मैं भूल गयी-
तेरे पुण्य उत्सर्ग के कारण अवसादों में झूल गई-
मेरी डोली, तेरी अर्थी के अंतर, देखो प्रतिकूल हैं-
मैं आँचल से लिपटी निकली ,तेरे स्यंदन पर फूल हैं-
मै आई थी लिपटी-चुपड़ी, बस आंगन एक सजाने को-
तेरा स्यंदन आज ,गगन को, बस जयघोष सुनाने को-
ये वलिदानी अर्थी जैसे सजी-धजी मेरी डोली-
आज भी देखो !मैने पहनी है साड़ी फिर वो पीली-
भले प्राण से मुक्त हुएं तुम प्रियतम मुझ से दूर कहाँ है-
ग़म मत करना ,रक्षित है बसुधा, तेरी बेवा का पहरा है...
Posted on: Oct 04, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पटना से वैधा बुलाई दा, नजरा गईनी गुइया : बिहारी लोक गीत
मालीघाट मुज्जफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक लोकगीत गीत सुना रहे है:
पटना से वैधा बुलाई दा, नजरा गईनी गुइया-
पटना से वैधा बुलाई दा, नजरा गईनी गुइया-
मोरा बलमु हो ओ हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ-
मोरा बलमु गईले पूवी बसनिया हो पूर्वी बसनिया-
पूर्वी बसनिया हो पूर्वी बसनिया-कोई कोई-
कोई सन्देशा पहुंचाई दा ओ नजरा गईनी गुइया-
ओ नजरा गईनी गुइया-ओ नजरा गईनी गुइया...
Posted on: Sep 30, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
जैसे को तैसा...कहानी
बहुत समय पहले की बात हैं, एक जंगल मे भैंस और घोड़ा के बीच लड़ाई हो गई |भैस ने अपने सींग से घोड़ा को मार मारकर अधमरा कर दिया | घोड़ा भागते भागते शहर के पास पहुँचा | वहाँ एक मनुष्य से सहयोग माँगा | मनुष्य ने बताया कि उसके बड़े बड़े सींग हैं, वह शक्तिशाली हैं और इससे हमें क्या लाभ होगा घोड़ा ने बताया की आप लाठी ले और मेरे पीठ पर बैठ जाये और में उसके पास तेजी से दौड़ता पहुँचुंगा आप उसे लाठी से मारा करना और भैस बहुत मीठी दूध देती हैं, तो उसे रस्सी से बांध कर घर ले आना | मनुष्य ने घोड़ा के बताये अनुसार काम किया | भैस को लाठी मार मारकर अधमरा कर दिया |करने के बाद उसे अपने घर रस्सी से बांधकर ले आया | अब घोड़ा ने मनुष्य से जंगल जाने की इजाज़त मांगी | इसपर मनुष्य ने घोड़े से कहा आपकी सवारी शानदार हैं अब आप जंगल क्यों जाओगे |इस तरह भैंस और घोड़ा की आपसी लड़ाई के कारण दोनों मनुष्य के गुलाम हो गये इसी कारण कहा गया हैं कि हम जैसा पेड़ लगाएंगे वैसे ही फल की प्राप्ति होगी .”जो जस करइ सो तस फल चाखा”....
Posted on: Sep 30, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
Bultoo Radio from Muzaffarpur Bihar in Bhojpuri language: 29th Sept 2016...
Today Sunil Kumar is presenting latest edition of Bultoo radio from Muzaffarpur Bihar in Bhojpuri language. In this program he has chosen songs from all over state of Bihar and Jharkhand from where people have sent songs in Bhojpuri language after calling CGnet Swara number 08050068000. Now this program can be downloaded by people from their Gram Panchayat office if it has Broadband or from a download centre nearby. They can also get it from someone with smartphone and internet via bluetooth.


