भारत भईले आजाद का तोहू करबे सिपहिया...लोक गीत
ग्राम-करमडीहा, धरमसुल्लीपारा, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से संजय कुमार कुशवाहा एक लोक गीत सुना रहे हैं :
भारत भईले आजाद का तोहू करबे सिपहिया – खुब तुहू करबे जेहल भेजी देबे – भला जेलवा से है ससुरल हो – भारत भईले आजाद का तोहू करबे सिपहिया...
Posted on: Feb 13, 2018. Tags: SANJAY KUMAR KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER
तोता दिया हुंकारा अमर कथा न सुनी हुमाऊ सोच रहे हुंकारा...गीत
मनोज कुमार कुशवाहा, ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड़वारी, जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से एक गीत सुना रहे हैं :
तोता दिया हुंकारा अमर कथा न सुनी हुमाऊ सोच रहे हुंकारा – अविनाशी कैलाशी काशी अपनी अलग बसाई थी – बैठ गुफा में गौर जी को अमर कथा सुनाई थी – आज यहाँ पर कोन तीसरा गोंगा जी जन आया है – चीरा करोली से शंकर जी को कर त्रिशूल उठाया है – आगे तोता पीछे शिवजी तीन लोक में बागे है...
Posted on: Feb 11, 2018. Tags: MANOJ KUMAR KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER
हरे भरे खेतो में देखो, कैसा तनकर खड़ा बिज्जुका...कविता
ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड़, जिला-पलामू (झारखंड) से अखिलेश कुशवाह एक कविता सुना रहे हैं:
हरे भरे खेतो में देखो कैसा तनकर खड़ा बिज्जुका-
सिर पर काली वाली हाड़ी है चुने का टिक्का-
कुर्ता टीला फटा चिथडा तनिक ना इसे सलीका-
हांथ पांव लकड़ी के इसके पर मन का है कड़ा बिज्जुका-
देख बिज्जुकी मिल गाए भैस और साड़ भड़कते – पास ना फटे कोई पक्षी सूरत देख हडकते...
Posted on: Feb 11, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER
मन मोर गाए हो श्यामा बजावत वीड़ा...गीत
संजय कुमार कुशवाहा ग्राम-करौंदिहा, धरम सुरलीपारा, तहसील-वाड्रफ नगर,
जिला-बलरामपुर, रामानुजगंज (छत्तीसगढ़) से एक गीत सुना रहे हैं :
मन मोर गाए हो श्यामा बजावत वीड़ा – हरे कृष्णा बजावत बीड़ा – मन मोर गाए हो श्यामा बजावत वीड़ा – हरे कृष्णा बजावत बीड़ा...
Posted on: Feb 08, 2018. Tags: SANJAY KUMAR KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : इमली कम है इसलिए इसका प्रयोग सब्जी बनाने में करते है बेच नहीं पाते हैं...
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-चारगाँव, पंचायत-भारवी, ब्लाक-भानुप्रतापपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात गाँव के राजेश कुमेटी से हुई है जो उन्हें इमली के बारे में बता रहे है उनका कहना है कि इमली के पेड़ उनके घरो में ही मिल जाती है पर उनके आसपास के जंगलो में आजकल इमली के पेड़ बहुत कम है. इमली का प्रयोग लोग खटाई बनाने में या सब्जी बनाने में करते है पर आजकल उत्पादन कम है इसलिए उसे घर में ही खाते है और उसको वे लोग नहीं बेचते है. अधिक जानकारी के लिए राजेश कुमेटी@7089052402.
