खेती के लिये देशी तकनीक उपयोग करते हैं...
ग्राम-नहकानार, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से राजकुमार कोर्राम बता रहे हैं कि वे 15 साल से खेती का काम कर रहे हैं और आज भी पारंपरिक साधनों का उपयोग खेती में करते हैं, अच्छी उपज के लिये जैविक खाद का उपयोग करते हैं, खेती के अलग अलग तरीके की तकनीक अपनाते हैं, अभी उन्होंने बीजो को रोपण करने के लिये बीज बुवाई का काम किया है, जो 3 से 4 माह में कटाई के लिये तैयार हो जायेगा|
Posted on: Jun 20, 2020. Tags: CG KONDAGAON RAJKUMAR KORRAM SONG STORY VICTIMS REGISTER
उपजाऊ शक्ति कम होती है इसलिये जैविक खाद का उपयोग करना शुरू कर रहे हैं...
गजानंद बता रहे हैं कि वे खेती करते हैं, वे खेती के हल और बैल का उपयोग करते हैं, खेती में उपज के उरिया का उपयोग करते हैं, अब धीरे धीरे राशायानिक खाद का उपयोग कम कर रहे हैं और दूसरो को भी इसके बारे में जानकारी देते हैं, राशायानिक खाद से भूमि की उपजाऊ क्षमता कम होती है और मिट्टी कड़ी होती है, ऐसे उपज का उपयोग करने से तरह तरह की बीमारी होती है, इसलिये अब वे जैविक खाद का उपयोग वापस से करने लगे है| (AR)
Posted on: Jun 20, 2020. Tags: GADCHIROLI KANHAIYALAL KEWAT MH SONG STORY VICTIMS REGISTER
हम सिहाड़ी बीज उबालकर खाते है<उसके जड़ से रस्सी बनाते हैं...माड़िया भाषा
नगर पंचायत-भामरागड जिला-गडचिरोली (महाराष्ट्र) से संतोष परसा सिहाड़ी बीज के बारे में बता रहे हैं सिहाड़ी बीज जंगल में मिलता है ये एक साल गैफ करके फलता है इसका फल छोटा-छोटा फल होता है कच्चा खाने से कडुआ लगता है इसे बीन कर लाते है लाकर उबालकर या भूँजकर भी खाते हैं इसके जड़ का रस्सी बनाया जाता है जिससे देन्दु पत्ती बाँधते है इसका रस्सी मजबूत होता है और भी काम आता है:संपर्क नम्बर @9423534885 (170027) CS
Posted on: Jun 20, 2020. Tags: BHAMRAGAD GADCHIROLI MH SANTOSH PARSA STORY
अच्छी फसल के लिये खेती में जैविक खाद का अधिक उपयोग करते हैं-
मलनार, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से मोनूराम सोरी बता रहे हैं वे किसान है, 3 एकड़ में खेती करते हैं, खेती के लिये वे पारंपरिक साधन का उपयोग करते हैं, खेती में गोबर खाद का उपयोग करते हैं, कभी कभी रासयनिक खाद डीपी का भी उपयोग करते हैं, इससे फसल में बाजार वाले खाद का ज्यादा असर नहीं होता है और अच्छा फसल मिल जाता है : संपर्क नंबर@6268173920. (AR)
Posted on: Jun 19, 2020. Tags: CG KONDAGAON MONURAM SORI SONG STORY VICTIMS REGISTER
नास्ते का दूकान लगाकर घर चलाते हैं, समस्या होती है लेकिन ये जीवन यापन का साधन है-
मिताई डे बता रहे हैं कि वे छत्तीसगढ़ के निवासी वर्तमान में भामरागढ़ महाराष्ट में रह रहे हैं, 22 साल से वहां रह रहे हैं, चाय नास्ते की दुकान चलाते हैं, इसी से अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं, जब से आये हैं तभी से इस काम को कर रहे हैं, ये काम उन्होंने अपने पैसे से शुरू किया था, कोई लोन नहीं लिया, उनका कहना है कि लोन हम गरीबो को नहीं मिलता है, मुद्रा लोन के लिये प्रयास किये थे लेकिन मिला नहीं, तब अपने से काम शुरू किया| इस काम में उन्हें दिक्कत भी होती है, कभी जगह से हटा दिया जाता है इस तरह से काम में समस्या है लेकिन घर चलाने के लिये काम करना है| (AR)
