हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं...गीत-
बड़वानी, मध्यप्रदेश से सुरेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं, जिसके बोल है, “हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं” | अपने गीत, संदेश रिकॉर्ड करने के लिये 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सकते हैं|
Posted on: May 16, 2021. Tags: BADWANI MP SONG SURESH KUMAR
पीड़ितों का रजिस्टर: सलवा जुडूम में उनके बड़े भैया की नक्सलियों ने घर आकर मार पिट कियें...
ब्लाक-भोपालपटनम, जिला-बीजापुर (छत्तीसगढ़) से सुरेश दुग्गा पिता कुरसंग दुग्गा बता रहे हैं, सलवा जुडूम में उनके बड़े भैया की नक्सलियों ने घर आकर मार पिट कियें| फिर वे लोग अपना गांव छोड़कर बीजापुर शिविर में आकर रह रहे हैं, अधिक जानकारी के लियें संपर्क नंबर@7648011962. GT
Posted on: May 05, 2021. Tags: BIJAPUR CG DISPLACED KILLED KURNSGA DUGGA SURESH DUGGA VICTIMS REGISTER VICTIM MAOIST
अहंकार...कहानी
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कहानी सुना रहे हैं:
दो हष्ट फुष्ट बैल बुमरिन सामान की बैलगाड़ी खींच रहे थे
दोनों बैलो के बीच एक कुत्ता भी चल रहा था उसका अहंकार की गाड़ी बैल नही मै खींच रहा हूँ चाल में उसकी सोंच साफ साफ झलक रही थी|
गाड़ीवान ने अपनी चाबुक बैलो को मारने की वजह कुत्ते को मारी
मार पड़ते ही कुत्ता वहां से दुम दबाकर भागा
और उसे अहसास हो गया की असल में गाड़ी बैल खींच रहे थे उसका अहंकार मिट चुका था झूठ के साथ पहले अहंकार पनपता है पर सच के सामने आते ही छड भर में चूर चूर हो जाता है |
Posted on: Apr 26, 2021. Tags: BARWANI MP STORY SURESH KUMAR
वाणी बदलो...कहानी-
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कहानी सुना रहे हैं:
एक कोयल आम के पेंड पर बैठी थी
एक कौआ तेज रफ्तार से उड़ कर जा रहा था
कोयल ने पूछा भैया कहाँ भागे जा रहे हो
कौआ बोला बहन इस देश को छोड़ कर विदेश जा रहा हूँ
क्यूंकि यहाँ मेरा सम्मान नही है जहाँ पर बैठता हूँ वहीं से उडा दिया जाता हूँ...(AR)
Posted on: Apr 25, 2021. Tags: BARWANI MP STORY SURESH KUMAR
जीवन पथ पर चलना हमको शिक्षक हैं बताते...कविता-
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार कविता सुना रहे हैं:
जीवन पथ पर चलना हमको शिक्षक हैं बताते-
न्याय और अन्याय का मतलब शिक्षक ये समझाते हैं-
बालक जैसी गिली मिट्टी शिक्षक कुमार बन जाते हैं-
एक के न्याय पे चाक को रखकर सुंदर कलम बन जाते हैं-
जग में शिक्षक न होते तो सोंचो फिर क्या होता-
पड़ी ही रहती बंजर भूमि बीज फिर कौन बोता...(AR)
