डुमरी के पीर म हो परसवाह गाँव हवय...गाँव गीत
ग्राम-परसवाह, जिला-डिंडोरी, (मध्यप्रदेश) से दीपक छत्तीसगढ़ी भाषा में उनके गाँव पर एक गीत सुना रहे हैं:
डुमरी के पीर म हो परसवाह गाँव हवय-
आमा के छाँव हवय चिड़िया करत हवे बसेरा-
पूछत है पूछत आवे दीपक मोरो नाम वो-
परसवाह म लगत है गौरी गुरुवार का बाजार वो-
तेह जरुर आबे परसवाह बाजार वो...
Posted on: Feb 19, 2017. Tags: DEEPAK DINDORI SONG VICTIMS REGISTER
Impact: Road work started again in our area after report on CGnet, thanks...
ग्राम-धनवा सागर, जिला-डिंडोरी (मध्यप्रदेश) से दीपक बिन्तारे बता रहे है कि पूर्वी मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाके में डिंडोरी से बिछिया तक मार्ग की स्थिति अत्यंत जर्जर थी और उसमे चलने में यात्रियों को बहुत दिक्कत होती थी खासतौर पर मरीजों को जिनका उस सड़क पर चलना लगभग नामुमकिन था. वे लोग अधिकारियों को अनुरोध करते करते थक गए थे फिर सीजीनेट स्वर में एक सन्देश रिकॉर्ड किये थे ढाई महिना पहले कि डिंडोरी से बिछिया मार्ग अधूरा पड़ा है करके तो सीजीनेट के साथियों के अधिकारियों पर दबाव डालने के बाद रोड का काम अभी प्रगति पर है इसलिए सीजीनेट सुनने वाले साथियों को और अधिकारियो को धन्यवाद दे रहे है|दीपक बिन्तारे@9754870423
Posted on: Feb 18, 2017. Tags: DEEPAK BINTARE ROAD SONG VICTIMS REGISTER
मजहब क्या है ?...एक कविता-
दीपक बागरी कमला मसीन की कविता सुना रहे है जिसका शीर्षक है : मजहब क्या है ?
आओ मिल कर ये सोचें-
क्या मजहब है क्या शैतानी-
क्या जायज है क्या बेमानी-
किस किस को हमें परखना है-
क्या तजना है क्या रखना...
Posted on: Feb 11, 2017. Tags: DEEPAK BAGRI
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : आलू के औषधीय गुण
पारंपरिक तौर पर आलू का इस्तेमाल वनवासी अनेक फार्मूलो में सदियों से करते चले आ रहे है मध्यप्रदेश के पातालकोट घाटी की बात हो या गुजरात के डांग जिले की आलू को सब्जी के आलावा कई तरह के हर्बल नुस्खो में आजमाया जाता है मध्यम आकार के आलू का रस तैयार किया जाए और एक गिलास मात्रा में रस प्रतिदिन सबेरे लिया जाए तो पाचन तंत्र व्यवस्थित हो जाता है इस रस के सेवन से एसीडीटी नियंत्रण में बहुत फायदा होता है वनवासियों की मान्यता के अनुसार यह रस पेट के छालो के लिए भी बहुत कारगर है जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर हो उनके लिए डांग गुजरात के हर्बल जानकार एक खास नुस्खा तैयार करते है रोगियों को उबले आलुओ का सेवन करने की सलाह देते है और नई रिसर्च बताती है कि आलू में पोटेशियम पाया जाता है और ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाने के लिए बहुत कारगर रसायन है| जिन लोगो को वजन कम करना है उनके लिए भी आलू बड़ा खास है उबले आलूओ को नमक छिडक दे और उस व्यक्ति को दे जो वजन कम करना चाहता है| वनवासियों के अनुसार ये बात गलत है कि लोग जो सोचते है कि आलू मोटापा बढ़ाने में एक प्रमुख अंग है| लेकिन ऐसा नहीं होता मोटापा आलू की वजह से बढ़ता है बल्कि आलू को तलने या भूंजने के लिए जो तेल इस्तेमाल में लाया जाता है उससे वजन बढ़ता है उबला हुआ आलू वैसे भी खूब सारे कैलोरी को लिए नहीं होता है तो इसे उबालकर खाए वजन कम होगा जिनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो गई हो उन्हें भी आलू खाना चाहिए| उबले आलू हो या कच्चे आलू हो यदि कच्चे आलू हो तो उसे कुचलकर उसका रस बनाकर ले उबले आलू को नमक डालकर या सेंधा नमक डालकर जरुर खाए ये पोषक तत्वों की कमी दूर करने में बड़े कारगर है ताजे आलूओ को कुचलकर पेस्ट बनाया जाए और इन्हें घाव और जले हुए अंगो और जलन करने वाले छालो पर लगाए तुरंत राहत मिलेगी और इसी तरह जिन्हें नींद नहीं आने की शिकायत हो उन्हें उबले आलू खाने चाहिए उबले आलू के अम्लो के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है और पेट में जो अम्ल है उनके स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है अक्सर अम्ल याने एसिड बढ़ जाए तो नींद अनियांत्रित हो जाती है ऐसे में उबला आलू बड़ा कारगर होता है|
Posted on: Feb 03, 2017. Tags: Deepak Acharya SONG VICTIMS REGISTER
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : ज्वार के औषधीय गुण
ज्वार का आटा पानी में घोलकर शरीर में लेप करने से शरीर की जलन दूर हो जाती है. ज्वार के आटे को पानी में मिलाकर रात में उबाल लिया जाए और अँधेरी जगह में रख दिया जाये सुबह इसमें जीरा और छाछ मिला देएसीडीटी में काफी फायदा होता है| भुनी हुई ज्वार को खाने से पेट में जलन कम होती है. जिन महिलाओ को मासिक धरम के विकार होते है उन्हें ज्वार के भुट्टे को जलाकर छान ले और उसकी राख के संग्रहित कर ले | इसकी 3 ग्राम मात्रा रोज सुबह खाली पेट मासिक धरम चालू होने से लगभग एक सप्ताह पहले लेना शुरू करें और जब मासिक धरम शुरू हो जाये तो इसका सेवन बंद कर दे. ऐसा करने से मासिक धरम के सभी विकार नष्ट हो जाते है ज्वार की रोटी को प्रतिदिन छाछ में डुबोकर खाने से जिन्हें अधिक प्यास लगती है, वह सुबह से बंद हो जाती है. ऊँचे पहाड़ो पर चढाई करने से पहले वनवासी अक्सर ज्वार की रोटी और छाछ का सेवन करते है. पीलिया रोग होने पर वनवासी इसके बीजो को उबालकर रोगी को इसका पानी देते है| माना जाता है कि ये पीलिया के दुष्प्रभावो को कम करता है और साथ में हिपेटाईटिस रोग में भी बेहतरी से काम करता है. दीपक आचार्य@9824050784
