आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : ज्वार के औषधीय गुण
ज्वार का आटा पानी में घोलकर शरीर में लेप करने से शरीर की जलन दूर हो जाती है. ज्वार के आटे को पानी में मिलाकर रात में उबाल लिया जाए और अँधेरी जगह में रख दिया जाये सुबह इसमें जीरा और छाछ मिला देएसीडीटी में काफी फायदा होता है| भुनी हुई ज्वार को खाने से पेट में जलन कम होती है. जिन महिलाओ को मासिक धरम के विकार होते है उन्हें ज्वार के भुट्टे को जलाकर छान ले और उसकी राख के संग्रहित कर ले | इसकी 3 ग्राम मात्रा रोज सुबह खाली पेट मासिक धरम चालू होने से लगभग एक सप्ताह पहले लेना शुरू करें और जब मासिक धरम शुरू हो जाये तो इसका सेवन बंद कर दे. ऐसा करने से मासिक धरम के सभी विकार नष्ट हो जाते है ज्वार की रोटी को प्रतिदिन छाछ में डुबोकर खाने से जिन्हें अधिक प्यास लगती है, वह सुबह से बंद हो जाती है. ऊँचे पहाड़ो पर चढाई करने से पहले वनवासी अक्सर ज्वार की रोटी और छाछ का सेवन करते है. पीलिया रोग होने पर वनवासी इसके बीजो को उबालकर रोगी को इसका पानी देते है| माना जाता है कि ये पीलिया के दुष्प्रभावो को कम करता है और साथ में हिपेटाईटिस रोग में भी बेहतरी से काम करता है. दीपक आचार्य@9824050784
