ईटा ला काट-काट चौड़ा चबावे रे...सरगुजिहा डोमकच गीत

ग्राम-सोनगरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मनिया बाई एक सगुजिहा डोमकच गीत सुना रही है:
ईटा ला काट-काट चौड़ा चबावे रे-
झाले कुटा आयो रे मडमडा व् तना-
मैं का जानूं सुना रे मडमडा व् तना-
भलेर-भलेर निबोय रे-
दातिला काट-काट चौड़ा चबावे रे...

Posted on: Apr 29, 2018. Tags: MANIYA BHAI SONG VICTIMS REGISTER

नेताजी बन गए बलात्कारी, जनता हो गई बेचारी...कविता

जिला-कानपुर, (उत्तरप्रदेश) से के.एम. भाई कविता के माध्यम से आज के परिदृश्य में जिस प्रकार से देश में नेता व जनप्रतिनिधियों द्वारा शोषण और आत्याचार की घटनाएँ बढ़ती जा रही है उसी पर आधारित एक कविता सुना रहे है:
नेताजी कर रहे है सम्भोग, नेताजी बन गए बलात्कारी-
नेताजी बन गए बलात्कारी, जनता हो गई बेचारी-
खाकी वर्दी बिक गई सरेबाज़ार, दारोगा जी कर रहे है अत्याचार-
लोकतंत्र की है ये पुकार, ख़ूब करों व्यभिचार-
ना करे कोंई हाहाकार, न हो कोंई चीख पुकार...

Posted on: Apr 18, 2018. Tags: K.M BHAI SONG VICTIMS REGISTER

न कभी गाँधी मरता है, न कभी राम...कविता -

कानपुर (उत्तरप्रदेश) से के एम भाई आज के हालात में धर्म से सम्बंधित एक कविता सुना रहे है:
राजनीति की आंच में-
झुलसता लोकतंत्र-
न कभी गाँधी मरता है-
न कभी राम-
बस मेरा शहर-
यूँ ही जलता है-
कल ही मैंने धर्म को मारा था-
पर ये क्या-
कमबख्त आज फिर पैदा हो गया-
कल ही मैंने राख बटोरी थी
पर ये क्या-
आज फिर मेरा घर जल गया-
ये आग भी बड़ी जालिम है-
जरा सी आंच में ही-
भड़क जाती है-
धुंआ कहीं और उठता है-
और दुनिया मेरी उजडती है-
लोकतंत्र भी बड़ा अभागा है-
महान होकर भी-
महान नहीं बन पाता-
मुक्त होकर भी-
दासता का जीवन बिताता...

Posted on: Apr 04, 2018. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER

भैया-भैया सुना-सुना साहब जी...छत्तीसगढ़ी में सीजीनेट गीत

विष्णु कुमार भैना ग्राम-नेवरी नवापारा, थाना-गौरेला, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से सीजीनेट के बारे में चातीसगढ़ी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
भैया-भैया सुना-सुना साहब जी-
देखा न कोन आये है नेवारी गांव मा-
और बतावथे सीजीनेट के बारे मा-
अरें आ गए है सीजीनेट देखा-
करा तुम शिकायत गा...

Posted on: Feb 09, 2018. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VISHNU KUMAR BHAINA

जब दिल में हो उमंग, मन में हो विश्वास...नववर्ष पर कविता -

कानपुर (उत्तरप्रदेश) से KM भाई नववर्ष के उपलक्ष में एक कविता सुना रहे है:
जब दिल में हो उमंग-
मन में हो विश्वास-
आँखों से झलके प्यार-
हल्की सी मुस्कान से-
हो सबका दिदार-
नव वर्ष का कुछ-
ऐसा हो आगाज़-
न रंग का घुमान हो-
न रूप का एक ही दिए से-
हर घर रौशन हो-
नयी मुस्कान के साथ-
नव वर्ष का विहान हो ...

Posted on: Jan 04, 2018. Tags: K.M BHAI SONG VICTIMS REGISTER

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