नेताजी बन गए बलात्कारी, जनता हो गई बेचारी...कविता
जिला-कानपुर, (उत्तरप्रदेश) से के.एम. भाई कविता के माध्यम से आज के परिदृश्य में जिस प्रकार से देश में नेता व जनप्रतिनिधियों द्वारा शोषण और आत्याचार की घटनाएँ बढ़ती जा रही है उसी पर आधारित एक कविता सुना रहे है:
नेताजी कर रहे है सम्भोग, नेताजी बन गए बलात्कारी-
नेताजी बन गए बलात्कारी, जनता हो गई बेचारी-
खाकी वर्दी बिक गई सरेबाज़ार, दारोगा जी कर रहे है अत्याचार-
लोकतंत्र की है ये पुकार, ख़ूब करों व्यभिचार-
ना करे कोंई हाहाकार, न हो कोंई चीख पुकार...
