दिन के सूरज रात तरईया चंदा करत है अंजोर...गीत-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक गीत सुना रहे हैं :
सावन के महीना गर्मी करय बड़ा जोर-
दिन के सूरज रात तरईया चंदा करत है अंजोर-
कभुहूँ पुरवईया कबहू पक्षिम हवा आये-
कबहूँ कहूँ बादल निकले मन को लुभाये-
तेरा महिमा कोई न जाने, मरजी ऐ काहे तू-
मख्खी मच्छर कारण नीद भूख भागे-
पानी के बिना जग मा सूना-सूना लागे..
Posted on: Jul 21, 2019. Tags: ANUPPUR KANHAIYALAL KEWAT MP SONG VICTIMS REGISTER
Impact : गाँव में पानी की समस्या थी, अब सुविधा हो गयी है...
ग्राम पंचायत-सेंदुरखार, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से मिथलेश मानिकपुरी बता रहे हैं| गाँव में पानी की समस्या थी| लोगो को 1 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था| गाँव पहाड़ के ऊपर बसा है| उन्होंने अपनी समस्या को सीजीनेट में रिकॉर्ड किया था| जिसके बाद जून 2019 में उनकी समस्या हल हो गयी है| इसलिये वे मदद करने वाले सभी साथियों और अधिकारियो को धन्यवाद दे रहे हैं| संपर्क नंबर@8964973228.
Posted on: Jul 20, 2019. Tags: CG IMPACT STORY KABIRDHAM MITHLESH MANIKPURI SONG VICTIMS REGISTER
इतय इतय चारो ओर, क्योटी क्योटी करे सीहोर...कविता-
ग्राम-रेवटी, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से अखिलेश कुसवाहा एक कविता सुना रहे हैं:
इतय इतय चारो ओर, क्योटी क्योटी करे सीहोर-
जहां तहां खटकत पास है-
भाजल सो चाहा गावर ग्वालनी के कछू-
डरने डराने से उठाने रोम गात है...
Posted on: Jul 20, 2019. Tags: AKHILESH KUSWAHA BALRAMPUR CG POEM SONG VICTIMS REGISTER
कोई नहीं पराया मेरा घर सारा संसार है...कविता-
ग्राम-नीलकंठपुर, पंचायत-गोरगी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जगदेव प्रसाद पोया एक कविता सुना रहे हैं :
कोई नहीं पराया मेरा घर सारा संसार है-
मै न बंधा हूँ देश काल की जंग लगी जंजीर में-
मै न खड़ा हूँ जात पात की ऊँची नीची भीड़ में-
मेरा धर्म न कुछ शब्दो का सिर्फ नाम है-
कोई नहीं पराया मेरा घर सारा संसार है...
Posted on: Jul 20, 2019. Tags: CG JAGDEV PRASAD POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
गेहूं गाये खेत-खेत म और बाजरा छम-छम नाचे...कविता-
ग्राम-कृष्णा नगर, धामनी, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से देवसन कुमार सरुता एक कविता सुना रहे हैं :
गेहूं गाये खेत-खेत म और बाजरा छम-छम नाचे-
चना बजता घूंघूंर छन छन और मूंग चयो कविता बाचे-
लोक गीत की कड़ी-कड़ी में जीवन का सरगम-
लोक कला का जादू जैसा, कदम-कदम बंधन लगता है...
