फुल गेंदवा ना मारो ना मरो...गीत-
जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गन्द्र्व गीत सुना रहें हैं:
आ अरे हां रे हां-
फुल गेंदवा ना मारो ना मरो-
लागत करेजवा मा छोट..(RM)
Posted on: Feb 21, 2021. Tags: CG HINDI SONG RAJNANDGONV
गणतंत्र रहे स्वतन्त्र रहे सदा हमारा देश...देश भक्ति कविता-
जिला-राजनंदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गन्धर्व कविता सुना रहे है:
गणतंत्र रहे स्वतन्त्र रहे सदा हमारा देश-
भाईचारे का यन्त्र रहे सदा हमारा देश-
लेना सीखे कम और देना सीखे ज्यादा-
दुनिया को सिखाए शिष्टता सभ्यता और मर्यादा-
मोहब्बत का मंत्र रहे सदा हमारा देश-
गणतंत्र रहे स्वतन्त्र रहे सदा हमारा देश...(184324)
Posted on: Feb 21, 2021. Tags: CG POEM RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV
पीडितो का रजिस्टर : मुझे पुलिस वालो ने 15 साल तक जेल में रखा था, मारपीट किये कोई मदद नहीं मिली...
ग्राम पंचायत-आतुरबेड़ा, तहसील-अंतागढ़, जिला-कांकेर (छत्तिसगढ़) से शानिराम नुरेटी बता रहें है कि पुलिस वाले ने उन्हे जेल ले गए थे और उनके घर में पूर्वज का एक बंदूक था पहले के दादा पूर्वजों ने घर का देवी देवता मानते थे उसको भी थाना में जमा किए मारपीट किये पैसा जमा करवाये जेल से आने के बाद पेशी 15 साल तक जेल गए थे उस समय उनके पत्नी 2 बच्चे और उनकी मां थे कोई कमाने वाले नहीं था | उनके घर के लोगो ने लोन लेकर के उनके घर वाले ने जेल से छुड़ाया अभी तब उनको लोन है उस समय 28 साल का था उनको कोई प्रकार से सरकार के तरफ से मदद नहीं मिली है सभी साथियों से मदद कि अपील कर रहें है| संपर्क@7646869560.
Posted on: Feb 21, 2021. Tags: CG KANKER SHANIRAM NURETI VICTIM REGISTER
ये अपना तिरंगा हैं प्राणों से भी प्यारा हैं...देश भक्ति गीत-
नया रायपुर (छत्तीसगढ़) से अनमोल कुमार चन्द्राकर देश भक्ति गीत सुना रहें हैं:
ये अपना तिरंगा हैं-
प्राणों से भी प्यारा हैं-
ये धरती ये अम्बर – ये देश हमारा हैं-
ये अपना तिरंगा हैं...(RM)
Posted on: Feb 20, 2021. Tags: HINDI SONG RAIPUR CG
वनांचल स्वर: परंपरागत खेती की आज की खेती से तुलना करते हैं...
ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार पटेल परंपरागत खेती की आज की खेती से तुलना करते हैं। मोदे गाँव में पहले परांपरगतढंग से खेती का प्रचलन था। यह इलाका नदी किनारे बसावट वाला है। यहाँ जंगल से आने वाला पानी जमीन में बैठकर जमीन को उपजाऊ बना चूका है। यहाँ खेती करने के लिए किसी प्रकार की खाद की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। मनोज के पूर्वज जमीन से पानी निकालने के लिए लकड़ी का ‘टेढ़ा’ बनाते थे। परन्तु आज खेती करने वाले लोग खाद का इस्तेमाल करते हैं। मनोज के मुताबिक इसका कारण यह हो सकता है कि देशी बीज के इस्तेमाल में कमी आई है। आधुनिकरण के कारण किसान अब कम समय में ज्यादा खेती करना चाहते हैं। सम्पर्क:- 9479070321, 6268684544 (185674) GT
