वनांचल स्वर: परंपरागत खेती की आज की खेती से तुलना करते हैं...
ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार पटेल परंपरागत खेती की आज की खेती से तुलना करते हैं। मोदे गाँव में पहले परांपरगतढंग से खेती का प्रचलन था। यह इलाका नदी किनारे बसावट वाला है। यहाँ जंगल से आने वाला पानी जमीन में बैठकर जमीन को उपजाऊ बना चूका है। यहाँ खेती करने के लिए किसी प्रकार की खाद की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। मनोज के पूर्वज जमीन से पानी निकालने के लिए लकड़ी का ‘टेढ़ा’ बनाते थे। परन्तु आज खेती करने वाले लोग खाद का इस्तेमाल करते हैं। मनोज के मुताबिक इसका कारण यह हो सकता है कि देशी बीज के इस्तेमाल में कमी आई है। आधुनिकरण के कारण किसान अब कम समय में ज्यादा खेती करना चाहते हैं। सम्पर्क:- 9479070321, 6268684544 (185674) GT
