हम हई नागर जोतवइया...धरती माँ पर छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया धरती माँ के सन्दर्भ में एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
हम हई नागर जोतवइया-
धरती कर सेवा करवइया भइया सेवा करवइया-
हम हई नागर जोतवइया नागर जोतवइया-
धरती कर सेवा करवइया भइया सेवा करवइया...
Posted on: Feb 13, 2016. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
आपन जन्म भूइयां ला बचावा दाई ओ....जमीन अधिग्रहण पर गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया प्रस्तावित परमाणु संयत्र व अन्य उपक्रमों के चलते होने वाले भूमि अधिग्रहण से संभावित विस्थापन के सन्दर्भ में एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
बचावा दादा रे बचावा भइया रे-
आपन जनम भूइयां ला बचावा दाई ओ-
बचावा भइया ओ बचावा दाई रे-
जल-जंगल-जमीन हमार गोंड के है अधीन-
बचावा काकी रे बचावा काका ओ-
हमार जनम भूइयां ला बचावा बहिन रे-
विदेशी कंपनी आवे बोर ला लगावे-
उंगली धरत-धरत पहुला ला पकड़े-
हे बचावा भइया रे.....
Posted on: Feb 08, 2016. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
छत्तीसगढ़ के हल्दीघाटी, माटी सोनाखान के...छत्तीसगढ़ी देशभक्ति कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया छत्तीसगढ़ी में एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
छत्तीसगढ़ के हल्दीघाटी, माटी सोनाखान के-
भारत के बन गई तीरथ, माटी सोनाखान के-
निवाए दमन से लड़िस इहां नारायण छाती तान के-
अंग्रेजन से लोहा लेहिस डहर चलिस बलिदान के-
कथा लहू से लिखिस पूरा, अउर ऊ देश अभियान के-
दीन-हीन के हितवा ओहर तीरथ रहिस किसान के-
हंसत-हंसत फांसी मा चढ़ गए प्रिय हो गए भगवान के-
उस शहीद के जन्मभूमि ई माटी सोनाखान के...
Posted on: Dec 16, 2015. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
पढ़ना-लिखना सीखो मेहनत करने वाले...प्रेरक गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
पढ़ना-लिखना सीखो मेहनत करने वाले-
पढ़ना-लिखना सीखो भूखे मरने वाले-
क, ख, ग, को पहचानों, अलिफ़ को पढ़ना सीखो-
अ, आ, इ, ई को हथियार बनाकर लड़ना सीखो-
ओ सड़क बनाने वाले ओ भवन उठाने वाले-
खुद अपने किस्मत का फैसला अगर तुम्हें करना है-
ओ बोझा ढोने वाले !
पढ़ना-लिखना सीखो मेहनत करने वाले...
Posted on: Dec 02, 2015. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
धरती ला कहत-कहत, चौरा छबवे हरे...सरगुजिहा विवाह गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया आदिवासी समाज का पारंपरिक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं जिसे शादी के अवसर पर आँगन में चबूतरा बनाकर, बड़ादेव को साक्षी मानकर गाते हैं :
धरती ला कहत-कहत-
चौरा छबवे हरे, धरती ला कहत-कहत-
चौरा छबवे रे झालर खुहुटा माड़ा वाताना-
माड़ वाता ना वे-
अरे ललना रे हमरे चहुंरा छवा -
