हमार जनम भुइयां ला, बचावा दादा रे...विस्थापन वेदना गीत
कैलाश सिहं पोया, ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छतीसगढ़ से हैं. गाँव में प्रस्तावित परमाणु उर्जा संयंत्र के लिए दो मशीनें आने वाली हैं, जिससे सभी ग्रामीण दुखी हैं, इसी सन्दर्भ में एक गीत सुना रहे हैं:
बचावा दादा हो...!
हाय रे..! बचावा दादा जी...
हमार जनम भुइयां ला, बचावा दादा रे
बचावा दाई ओ, बचावा बहिन रे!
बचावा भैया जी !
हमार जनम भुइयां ला, बचावा बहिन रे...
झोला धर-धर, झोला-झोला पैसा धर-धर
कोजिया नहीं मिले दाल, नइयो मिले चाउर...२
बचावा दादा हो !
हायरे बचावा दादा जी...!
Posted on: Oct 29, 2014. Tags: Kailash Singh Poya SONG VICTIMS REGISTER
ये जंगल है जीव के प्राण, जंगल हमर जीव के प्राण...
ग्राम-देवरी,जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया जी एक गीत के माध्यम से बता रहे हैं कि उनके यहाँ जंगलो की अंधाधुंध कटाई हो रही हैं, जिसके कारण बारिश कम हो रही हैं, समस्याएँ बढ़ रही हैं, इसे बचाना होगा:
ये जंगल है जीव के प्राण, जंगल हमर जीव के प्राण
जंगल में हैं जड़ी-बूटी, कन्दमूल, कांदा-किसान
ये तो हमरे जीव के प्राण,जंगल हमरे जीव के प्राण
जंगल हमर दाई-दाऊ, हवा-पानी देथे
सब जे के शुद्ध सांस, हवा ला पियाथे
हमर जंगल जीव के प्राण...
Posted on: Oct 26, 2014. Tags: Kailash Singh Poya SONG VICTIMS REGISTER
हम तो धरती के किसान, भईया धरती के किसान...
कैलाश सिंह पोया, ग्राम-देवरी,जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से एक गीत गा रहे हैं. गीत किसानों के महत्व व आधुनिक परेशानियों पर आधारित है:
हम तो धरती के किसान
भईया धरती के किसान
धरती में खेती कर थएन, धरती के शान
सब जन का दिया ला धियान
भईया भारत के किसान...
कोदो-कुटकी-साँवा, अऊ ! बोथन धान
जेहि अन्न ला खाइके, सब क बढ़ल शान
धरती के किसान...
कलेक्टर-विधायक-मंत्री, कंपनी से मिल-मिलके
छत्तीसगढ़ में खोलथन खदान
भईया हम तो भारत...
हम तो भरता के किसान
