ये जंगल है जीव के प्राण, जंगल हमर जीव के प्राण...
ग्राम-देवरी,जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया जी एक गीत के माध्यम से बता रहे हैं कि उनके यहाँ जंगलो की अंधाधुंध कटाई हो रही हैं, जिसके कारण बारिश कम हो रही हैं, समस्याएँ बढ़ रही हैं, इसे बचाना होगा:
ये जंगल है जीव के प्राण, जंगल हमर जीव के प्राण
जंगल में हैं जड़ी-बूटी, कन्दमूल, कांदा-किसान
ये तो हमरे जीव के प्राण,जंगल हमरे जीव के प्राण
जंगल हमर दाई-दाऊ, हवा-पानी देथे
सब जे के शुद्ध सांस, हवा ला पियाथे
हमर जंगल जीव के प्राण...
