ये कैसा खिलौना है, जो छूते ही टूट गया...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
ये कैसा खिलौना है, जो छूते ही टूट गया-
दिल में जो अरमान था, पल भर में मिट गया-
आँखों के सामने मेरी माँ चल बसी, देखते-देखते चिता जल गई-
धुंआ उठा एक पल के लिए और फिजा में बिखर गई-
दिल की तमन्ना दिल में रह गई, मेरी माँ मेरे से बहुत दूर चली गई-
आँखों के आगे अँधेरा छा गया-
आंसू पोछने वाला भी कोई ना रहा...

Posted on: Sep 25, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

मन से मन को मिलाईये तो मन मंदिर हो...गीत-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गीत सुना रहे हैं, जिसका शीर्षक है मन ही मंदिर :
मन ही मंदिर मन ही पूजा, मन से बड़ा ना कोय-
मन से मन को मिलाईये तो मन मंदिर हो-
मन ही ब्राम्हा, मन ही विष्णू, मन ही सदा शिव हो-
मन ही आकाश, मन ही पताल, मन ही नक्षत्र हो-
मन ही लक्ष्मी, मन ही दुर्गा, मन ही सरस्वती हो-
मन से मन को मिलाईये तो मन मंदिर हो...

Posted on: Sep 24, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

मम्मी और बेटी के बीच की वाद संवाद...

मम्मी बेटी से कहती है बेटी अब तुम लड़को से ज्यादा मटरगस्ती मत किया करो, तुम जवान हो चुकी हो, बेटी कहती है मम्मी इस उमर में मटरगस्ती नही करूंगी तो क्या बुढ़ापे में करूंगी-
मम्मी-अब तुम लड़को से ना मिला करो बदनामी होगी-
बेटी-आप भी तो अप्पू अंकल से पापा से छुप-छुपकर मिला करती हैं, क्या आपकी बदनामी नही होती है-
मम्मी-बेटी मै तो मम्मी बन चुकी हूँ, मेरा क्या है पर अभी तुम कवारी हो, तुम्हारी शादी तक नही हुई है-
बेटी-मम्मी मेरी भी शादी हो जाएगी, मै भी माँ बन जाउंगी आप चिंता किया ना करें-
मम्मी-बेटी तुमको कौन समझाए, तुम तो नासमझ, बड़ी जिद्दी हो-
बेटी-मम्मी आप भी तो मेरी उमर में बड़ी जिद्दी नासमझ रही होंगी, इसलिए तो मै भी आप की तरह हूँ-
मम्मी कोई जवाब नही दे पाती, दोनों चुप होकर अलग-अलग चले जाते हैं...

Posted on: Sep 23, 2018. Tags: CG KANAHIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER

सच्चाई को दीमक चाट गया, झूठा करे यहां राज...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी आज की समसामयिक परिस्थिति पर एक कविता सुना रहे हैं :
सच्चाई को दीमक चाट गया, झूठा करे यहां राज-
झूठों का पोल खुल गया, फिर भी नही आती उनको लाज-
शर्म हया को ताक में रखकर, करते है काम काज-
समाज के आँखों में धूल झोककर, नही जानता अपना समाज-
अपने ही आन बान में जो मस्त हो, उन्हें समाज से क्या लेना देना-
जो दुनिया को ठोकर मारता हो, वही तो लूट लेता है खजाना...

Posted on: Sep 21, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

एक तिल के लिए ही क्यों लड़ बैठे भाई...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
एक तिल के लिए ही क्यों लड़ बैठे भाई-
एक दिल को क्यों हम पटाते नही भाई-
दस दिल हो जाने पर भी हमें परवाह नही-
सौ दिल टूट जाएं तो भी हमें कोई गम नही-
हमारी भूख बढ़ती ही जाती है, भूख कब तक सहें-
हमारा वतन चला जा रहा है, सूखा कब तक सहें...

Posted on: Sep 20, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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