ये कैसा खिलौना है, जो छूते ही टूट गया...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
ये कैसा खिलौना है, जो छूते ही टूट गया-
दिल में जो अरमान था, पल भर में मिट गया-
आँखों के सामने मेरी माँ चल बसी, देखते-देखते चिता जल गई-
धुंआ उठा एक पल के लिए और फिजा में बिखर गई-
दिल की तमन्ना दिल में रह गई, मेरी माँ मेरे से बहुत दूर चली गई-
आँखों के आगे अँधेरा छा गया-
आंसू पोछने वाला भी कोई ना रहा...
