इंकलाब का परचम खोल आज बना ले आपना बोल...कविता-
ग्राम पंचायत-रिमारी, जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से लालजी वैश्य एक कविता सुना रहे हैं:
इंकलाब का परचम खोल, आज बना ले अपना बोल-
अपनो ने ली तेरी जान, तू अपनी ताकत पहचान-
जय जवान और जय किसान, यह नारा मिलकर बोल-
मत सह चुप रहकर अन्याय, समझ ना अपने को निर उपाय-
तोड़ ये बेबसी की जंजीर, तू ही देश की है तकदीर-
अपना खून पसीना तौल, मेहनत का ले पूरा मोल...
Posted on: Aug 08, 2018. Tags: LALJI VAISHYA PRADESH SIDHI MADHYA SONG VICTIMS REGISTER
मोरे गंवई के माटी हा, मोला सरस सही लागे गा...छत्तीसगढ़ी गीत-
ग्राम-लामकन्हार, तहसील-अंतागढ़, जिला-कांकेर उत्तर बस्तर (छत्तीसगढ़) से कुमारी प्रीति गावड़े और कुमारी निन्देश्वरी गावड़े एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
मोरे गंवई के माटी हा, मोला सरस सही लागे गा-
तरिया नदिया अउ अमरैया जग सुहावन लागे पुरवैया-
कोयलिया हा करे गुटुर गू, मैना ताल सुनावे गा-
आमा अउ इमली के सुघ्घर छैंया, बड़े मन मोला भावे गा-
मोरे गंवई के माटी हा मोला सरस सही लागे गा...
Posted on: Aug 06, 2018. Tags: KANKER CHHATTISGARH PREETI NINDESHWARI SONG VICTIMS REGISTER
ईता के लाल ते दानो नी यो लाने लाले बड़ा नोनिया...गोंडी विवाह गीत-
ग्राम-चुनामटका, मंडला-उज्वल्पुरम (आंध्रप्रदेश) से खुराम नंदनी एक गोंडी विवाह गीत सुना रही है:
ईता के लाल ते दानो नीयो लाने लाले बड़ा नोनिया-
निमा इंगा निम्मा नोनिया-
ईता के लाल ते दानो नीयो लाने लाले बड़ा नोनिया-
बेगा योना सात नोनिया-
ईता के लाल ते दानो नीयो लाने लाले बड़ा नोनिया-
हयायो दनी यरमा नोनिया-
ईता के लाल ते दानो नीयो लाने लाले बड़ा नोनिया...
Posted on: Jul 30, 2018. Tags: ANDHRAPRADESH GONDI SONG KHURAM NANDNI
एक घर की कहानी (गोंडी भाषा में)
ग्राम-मेढ़ो, तहसील-दुर्गूकोन्दल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से उत्तम आतला के साथ विदेशी कुमरे है जो उनके परिवार, घर और अपने जीवन के बारे में गोंडी भाषा में बता रहे है, उनके यहां अभी धान का रोपा लगा रहे है, उसका काम अभी पूरा नहीं हुआ है | उनके घर में 6 सदस्य है उसमे उनका बेटा और बहू और 2 बच्चे है जो स्कूल जाते है| बेटा बहू उनके साथ खेत के काम में हाथ बटाते है उनके घर में ज्यादा किसी प्रकार की सब्जी भाजी नहीं होती है इसलिए वे लोग बाजार से खरीद कर लाकर खाते है |
Posted on: Jul 28, 2018. Tags: GONDI KANKER VIDESHI KUMRE
अभी तो चलना है क्योंकि सफ़र दूर तक है...कविता
ग्राम पंचायत-पढ्गी, तहसील-सिरमौर, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश प्रसाद यादव एक कविता सुना रहे है:
अभी तो चलना है क्योंकि सफ़र दूर तक है-
मंजिल का तो पता नहीं पर नज़र दूर तक है-
कल कुछ पल के लिए जो गुफ्तगू हुई उनसे-
कोई भले ही न जाने पर ये खबर दूर तक है-
मत छुआ कर किसी भी अनजान आदमी को-
आज हर इंसान के बितर जहर दूर तक है-
हर रोज एक कटी पतंग मेरी छत पर आती है-
इशारा उसका भी यही है की शहर दूर तक है-
रुख मोड़ लिया है प्रेम ने,इर्ष्या के बहाव में-
नफरत से भरी नदी की लहर अब दूर तक है-
सुरीली आवाज से कोयल अब न गाएगी गीत-
कौओ का भी उससे सियासी कहर दूर तक है-

