न रोजी है न रोटी हैं, न रोजी है न रोटी है...कविता-

कैलाश सिंह पोया सूरजपुर छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं:
न रोजी है न रोटी हैं, न रोजी है न रोटी है-
न तन पे लंगोटी हैं ,न तन पे लंगोटी है-
पर वहां मंदिर मस्जिद को रोते हैं-
पर वहां मंदिर मस्जिद को रोते हैं-
पीठ पेट से लग आई ,पीठ पेट से लग आई...

Posted on: Feb 12, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

इंदिरा आवास सरकारी योजना की मदद के लिए ३-४ साल से चक्कर लगा रहा हूँ, कृपया मदद करें...

ग्राम देवरी थाना चंदौरा जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया बता रहे हैं कि वे इन्दिरा आवास योजना के तहत मिलने वाले आवास के लिए पिछले तीन-चार सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है इनका कहना हैं उन्होंने आवास में मदद के लिए ग्राम सभा में भी अर्जी लगाई थी लेकिन अभी तक आवास बानाने के लिए नाम नहीं आया हैं. वे इस काम के लिए अब हम सब की मदद चाहते हैं. वे अनुरोध कर रहे हैं कि सीजीनेट श्रोता
कलेक्टर जी.आर.चुरेन्द्र का नम्बर@9893509012 एस.डी.एम.ओपी सिंह का नम्बर@09424166557 सीईओ का नम्बर@9406128383 पर फोन कर के यह पूंछे कि उन्हें सरकारी मदद आखिर क्यों नहीं मिल रही है. कैलाश@8602008444

Posted on: Feb 10, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

आओं रे आओ रे यो मेरे देवता गोंडवाना के देव, जागो रे जागो ओ मेरे देवता खबर हमारी लेव...गोंड धर्म गीत

कैलाश सिंह पोया एक गोंडवाना धर्म गीत सुना रहे हैं:
आओं रे आओ रे यो मेरे देवता गोंडवाना के देव-
जागो रे जागो ओ मेरे देवता खबर हमारी लेव-
साल साज के बड़े देवता सुमरो, दुनिया बनावन हार-
देव धर्म के देवगांन गुरु सुमरो, कोया धर्म चलाय-
सिंगार दीप के सम्भु खे सुमरो, कोया वंश चलाय-
कली कंकाली दाई खे सुमरो, संकंट हो जा सहाय-
खेर खुट की खैर को सुमरो, खेरो की रखवाल-
खिला मुठुहा देव के सुमरो, अन्न धन देवन हार-
माला दाई हम तोहे सुमरो, गढ़ पुरवा की माय-
भेरो बाबा हम तोहे सुमरो, शक्ति देवन हार-
मेहरगढ़ की हिंगलाज खे सुमरो, ज्ञान की ज्योति जलाय...

Posted on: Feb 08, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

चलो,चलो संगी धाम कचारगढ, चलो,चलो साथी कचारगढ...गोंडवाना धार्मिक गीत

कैलाश पोया, ग्राम- देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से गोंडवाना धार्मिक कचारग़ढ यात्रा गीत गा रहे हैं यह मेला महाराष्ट्र में हर साल फरवरी माह में लगता है जिसमे हज़ारों गोंड आदिवासी इकट्ठा होते हैं :
चलो,चलो संगी धाम कचारगढ, चलो,चलो साथी कचारगढ-
मेला लागत है, गोंडवाना के नाम, मेला लागत है, गोंडवाना के नाम-
संगी नशा मुक्त रहकर समाज के लिए अभियान चलाना-
सत्य बोलना, सत्य पर चलना, बिना लोभ के कार्य करना-
माता पिता की सेवा करना, सत्य संस्कृति धर्म के अनुसार चलना...

Posted on: Feb 08, 2017. Tags: Kailash Singh Poya

अपने हक़ की लड़े लड़ाई, अपने को पहचानो...कविता

कैलाश सिह पोया एक कविता सुना रहे हैं:
अपने हक़ की लड़े लड़ाई, अपने को पहचानो-
पढना लिखना सीख गये, अब पूरी दुनिया जानो-
अपने हक़ की लड़े लड़ाई, अपने को पहचानो-
पढना लिखना सीख गये, अब पूरी दुनिया जाने
यह कैसे हो सकता है, यह मिलकर सोचे-
सुख सुविधा गाँव-गाँव तक कैसे पहुंचे...

जय सेवा,जय जोहार, जय बड़ादेव

Posted on: Feb 07, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

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