जाग जा खेती करोया बाहर से आवत है लुटिया...किसानो पर गीत
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया किसानो पर आधारित एक गीत सुना रहे हैं :
जाग जा खेती करोया बाहर से आवत है लुटोया-
धरती ला लूटत है, शोषण ला करत है-
गुंडागर्दी करत है, बाहर से आवत है लुटोया-
जगा, जगा खेती करो यार-
धन ला लूटे, ईमान ला लूटे-
यही है बैमानी करे यार-
बाहर से आवत है लुटोया...
Posted on: Mar 04, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
हाथी करे परेशान, हाथी मन करे परेशान...हाथी गीत
ग्राम-देवरी जिला-सूरजपुर छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पाया बोल रहे हैं कि उनके घर के पास गाँव में जंगल में हाथी परेशान करता है, हम ग्रामीणों की मदद की जाए-कृपया आप इन नम्बरों पर फ़ोन कर दबाव बनाए- कलेक्टर सूरजपुर@9893509012, वन विभाग के गार्ड,(दरोगा)@8889472625 और इसी विषय पर एक स्वरचित गीत सुना रहे हैं:
हाथी करे परेशान, हाथी मन करे परेशान-
हमर फुतकी में प्राण संगी हाथी करे परेशान-
नींद भर सुथी नहीं, भूख भर खाना नहीं-
हमके करथे परेशान-
हाथी करे परेशान, हाथी मन करे परेशान...
Posted on: Feb 28, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
चुमू कहर चुमुक-चुमुक बाजे रे सैया हमर घर आवे...फागुन गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक फागुन गीत सुना रहे है:
चुमू कहर चुमुक-चुमुक बाजे रे सैया हमर घर आवे-
रानकर ला हरा यहाँ उड़कर फहरा यहाँ सैया हमर घर आवे-
गंगा के लहर-लहर दूर के फहर-फहर अब लहर दा रे-
चुमू कहर चुमुक-चुमुक बाजे रे सैया हमर घर आवे...
Posted on: Feb 22, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
लाख-लाख गाँव वाला है, हिन्दुस्तान किसान का...किसान कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया खेती-किसानी और भारतीय किसान पर एक कविता सुना रहे है:
लाख-लाख गाँव वाला है, हिन्दुस्तान किसान का-
करने को निर्माण चला है यथा वीर जवान का-
सींच पसीने की बूंदों से धरती हरी बनायेंगे-
ऊपर बंजर धरती में भी फसल नया उगायेंगे-
भाग्य सजाने चले आज हम खेती व खलियानों का...
Posted on: Feb 20, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
काले मुहं का बंदर है, पेड़ खूब हिलाता है...बंदर और चिड़िया की कविता
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया बन्दर और चिड़िया पर आधारित एक कविता सुना रहे है:
काले मुहं का बंदर है, पेड़ खूब हिलाता है-
कच्चा हो या पक्का फल पूरा ही खा जाता है-
चिड़िया प्यारी-प्यारी है धीरे से आ जाती है-
मम्मी जो भी खेला लाती चुपके से खा जाती है...
