जितना मिले उतने में ही संतुष्ट होना चाहिए, लालच नहीं करना चाहिए...एक भूखे कुत्ते की कहानी...
ग्राम-आलमपुर, तहसील-चिचोली, जिला-बैतूल (मध्यप्रदेश) से मोहन यादव एक कहानी सुना रहे हैं: एक कुत्ता भोजन की तलाश में किसी गाँव में गया उसे सूने मकान में आधी रोटी मिल गई वह उसे लेकर आगे बढ़ रहा था, रास्ते में उसे एक नदी मिली जिसे वो पार कर रहा था जैसे ही वो बीच नदी में गया उसको पानी में अपने परछाई के रूप में एक प्रतिद्वंदी दिखाई दिया उसके मुहं में भी एक रोटी थी, फिर कुत्ते के मन में लालच आया और उसने सोचा कि आधी रोटी इसके पास है आधी मेरे पास है, सबको मिला के आराम से खाउंगा इसलिए मै इस पे हमला करता हूँ, जैसे ही कुत्ते ने हमला किया रोटी मुहं से नदी में गिर गई| यानि व्यक्ति को जितना मिले उतने में ही संतुष्ट होना चाहिए, आगे जो उसका नही है उसमे लालच नही करना चाहिए...
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: BETUL CHICHOLI MOHAN YADAV MP SONG STORY VICTIMS REGISTER
कसूर घूटे पराड येलो दुवार तूने नेराड़ा हो...गोंडी गीत
ग्राम-पिंडकसा, पंचायत-कुरेनार, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मोंगरी, सोगीबाई, रतोबाई और पोलोबाई गोंडी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
रे रे लोयो रेला रेला रे रे लोयो रेलाय हो-
कसूर घूटे पराड येलो-
दुवार तूने नेराड़ा हो-
जाति बाती पेकोर हो-
जाति बाती पेकोर-
कसूर घूटे पराड येलो-
दुवार तूने नेराड़ा हो...
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG GONDI KANKER MOGRI PAKHANJUR RATOBAI SOGIBAI SONG
हमारे गाँव में ज्यादा लोग छत्तीसगढ़ी बोलते हैं पर हमलोग मातृभाषा गोंडी को बचाकर रखना चाहते हैं...
ग्राम-भुरभुसी, पंचायत-जबेली, तहसील-पखांजूर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रैनूराम कोला और सालेकराम टोप्पो सीजीनेट के अमर मरावी को उनके गाँव में बोले जाने वाले भाषाओं के बारे में बता रहे है कि वहां के आदिवासी गोंडी भाषा में बहुत कम बोलते है छत्तीसगढ़ी भाषा में ज्यादा बातचीत करते है और घर में अपने परिवार के साथ गोंडी भाषा में बात करते हैं जो आदिवासियों की मातृभाषा है |उस भाषा को भूलते जा रहे है अब धीरे-धीरे मातृ भाषा लुप्त होते जा रही है| लेकिन अब आदिवासी लोग अपनी भाषा को बचाकर रखना चाहते है| उनके गाँव में सीजीनेट की यात्रा पहली बार गया हुआ था| वहां के लोगो को बहुत अच्छा लगा |
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG KANKER LANGUAGE PAKHANJUR RAINURAM KOLA SALEKRAM TOPPO SONG VICTIMS REGISTER
ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी (गोंडी)
ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से दुर्गुराम कवाची (सरपंच) उनके ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी में बता रहे है कि बहुत समय पहले उनके गाँव के आसपास पूरा जंगल था वहां पर 10-12 घर थे और ओरछा के पेड़ सबसे ज्यादा थे लेकिन वहां पर सरकार ने पूरे ओरछा के पेड़ कटवा दिए तो फिर वहां पर जनसँख्या बढ़ने लगी और उन्ही पेड़ो के कारण उस गाँव का नाम ओरछा रखा गया और यह जानकारी उनके गाँव के बुजुर्गो के माध्यम से मिली |आदिवासी गाँव अक्सर उनके आसपास पाए जाने वाले प्राकृतिक वस्तुओं पर रखे जाते हैं ओरछा को गराड़ी या गर्रा या विषफल भी कहते हैं घरों में बल्ली और खेतों में बागड़ की तरह यह उपयोग में लाया जाता है
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: CG DURGKONDAL DURGURAM KAVACHI GONDI KANKER STORY
सूरजपुर जिले में सिलौटा से सेमरा जाने वाला रास्ते में बाबा जलेश्वर नाथ शिव का मंदिर पड़ता है...
ग्राम पंचायत-सिलौटा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल केवट बता रहे हैं पंचायत सिलौटा से सेमरा जाने वाला रास्ते के दौरान पड़ने वाला मंदिर बाबा जलेश्वर नाथ शिव पड़ता है जो मंदिर का वर्णन करते हुए बता रहे हैं की अन्दर राधा कृष्ण का मंदिर है जहाँ एक कोने में नाग देव, गणेश, पंच मुखी हनुमान जी,विष्णु जी, विराजमान है मंदिर के अन्दर परिक्रमा पास में एक विशाल मदिर का निर्माण हो रहे है जहाँ शिव लिंग के साथ लक्ष्मी जी साथ में है यहाँ जल धारा का प्रवाह होत़ा है जिसे वहां के भक्त जनो के द्वारा सुरक्षित कर दिया गया है यहाँ दर्शनार्थियों के लिए धर्मशाला भी है जो सर्व साधन उपलब्ध है यहाँ यात्री रूककर धरम लाभ लेते हैं: कन्हैया लाल@8225027272.
