चुडूर मतना बोरल मतना कोराते गरसाछी...गोंडी गीत
ग्राम-कोपरिया, पोस्ट-रामनगर, जिला-मंडला (म.प्र.) से चन्दन कुमार धुर्वे एक गोंडी गीत सुना रहे हैं यह गीत शादी के समय में गाया जाता है:
चुडूर मतना बोरल मतना कोराते करसाछी-
नवा दाई कितिन नाकुन निया सी पड़ा-
कोराते करसाछी नाकुन माया इमा सीती नवा दाई...
Posted on: Oct 06, 2016. Tags: CHANDAN KUMAR DHURWEY SONG VICTIMS REGISTER
कथी के कघही शितल मईया : देवी गीत...
अनीता कुमारी एक देवी गीत सुना रहीं है:
कथी के कंगही शितल मइया कथी के लागल हो तार-
कथिये बइठल शितल मइया झारि लामी हो केश-
टूटी गेलइ कंगही शितल मइया मुड़ी गेलइ हो तार-
झटकत जाली शितल मइया सोनरा के दुकान-
हाथ तोरा टूटतइ रे सोनरा जवानी लागे हो घुन-
जौना हाथे गढ़ले रे सोनरा ककहिया केश हो तार-
रोवली सोनरा के मइया माता के हो दुआर-
ऐमकी गुनहिया शितल मइया बक्शीश हो हमार-
फिरु से गढ़ाएब हो मइया ककहिया केश हो तार...
Posted on: Oct 06, 2016. Tags: ANITA KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
मइया के मांगो टीका शोभे बचवा बड़ा नीक लागे...देवी गीत
अनीता कुमारी एक देवी गीत सुना रही है:
भवानी गोर बिछिया झुनुर झुनुर बाजे-
मइया के मांगो टीका शोभे बचवा बड़ा नीक लागे-
मइया के कानो में झुमका शोभे झुलनी बड़ा नीक लागे-
मइया के नाको में नथिया शोभे बिंदिया बड़ा नीक लागे-
मइया के लाली चुनरी शोभे चुड़िया बड़ा नीक लागे-
मइया के पांव में पायल शोभे झुनकी बड़ा नीक लागे-
भवानी गोर बिछिया...
Posted on: Oct 04, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
एकता की कहानी: एक साथ रहने से कठिन से कठिन काम भी आसान हो जाते हैं
बहुत समय पहले की बात हैं एक मुहल्ले में रामकली और रूक्मिणी दो बहनें रहा करती थी .छोटी होने के बावजूद दोनों बहने समझदार और होशियार थी. एक बार की बात हैं एक सप्ताह तक लगातार मूसलाधार वर्षा होने के कारण जो ग्रामीण मुहल्ले मे जलावन के लिए लकड़ी लाया करते थे नहीं ला पाये जिस कारण घर में खाना बनाने के लिए जलावन समाप्त हो गये . रामकली की माँ ने रामकली के पापा से कहा घर के सारे जलावन समाप्त हो गये हैं अब खाना कैसे बनेगा ? रामलाल जी ने कहा की ठहरो में पास के गांव से जलावन लेकर आता हूं .रामलाल जी को जाने के बहुत देर बाद खाना बनने का इंतजार करते करते रक्मिणी और रामकली भी घुमने चली गई .घुमते घुमते वह रामबाग पहुंच गई .रामबाग मे रूक्मिणी और रामकली अपने आम के बगीचा में अक्सर खेलने जाया करते थे. दोनों बहनो ने देखा की बग़ीचा में आम की मोटी सुखी डाली आँधी के कारण गिरी हुई हैं दोनों बहनो ने सोचा की इसे उठा कर घर ले के चलते हैं परंतु दोनों बहन से
आम की डाली उठ नहीं पाई .रक्मिणी ने देखा कि बहुत सारी चीटियां एक मरे हुए मोटे लकड़ी के कीड़े को उठा कर ले जा रही थी .ऐसे में कभी-कभी बहुत सारी चीटियां दब भी जाया करती थी फिर दुसरी बहुत सारी चीटियां मरे हुए मोटे कीड़े को धक्का मार मार के अपनी चीटियों को बचाया करती थी .रूक्मिणी ने सोचा की हमारे दोस्त आ जाये तो आसानी से आम की सूखी मोटी डाली को घर ले जाया जा सकता हैं. फिर दोनों बहने ने सोचा की हम दोनों बहने यहाँ से अपने घर जायेंगे तो कोई दुसरे इस सूखी आम की डाली ले जा सकते हैं .रूक्मिणी ने रामकली को बगीचा में बिठाकर अपनेदोस्तों को बुलाने चली गई .सारे दोस्त बग़ीचा में आकर आम की सूखी मोटी
डाली को ले आए .इसे देखकर रूक्मिणी और रामलाल के पिता रामलाल बहुत खुश हुए .रामलाल जी ने सभी बच्चों को कठपुतली का खेल दिखाया और कठपुतली के माध्यम से बताया बच्चों मेल में बहुत बल हैं .कठिन से कठिन काम भी हम मिलजुलकर आसानी से कर सकते हैं .मिलकर रहनेसे कोई हानी भी नहीं पहुँचाता साथ ही आपस में मिलकर रहने से मन भी प्रसन्न रहता हैं.
Posted on: Oct 04, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पीली साड़ी, हाथ मेंहदी, बाजूबंद में आई थी...शहीद कविता
बिहार (गया) के बेटे शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी की “वीरांगना” पत्नी पर मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
पीली साड़ी, हाथ मेंहदी, बाजूबंद में आई थी-
वो भी क्या दिन थे ,सुहाग के आंगन में तरुणाई थी-
बड़ा स्वप्न था तेरे कंधे पर चढ पहुचूंगीं मैं श्मशान-
उठा लिया अपने कंधे पर, पर घाव नही तेरा वलिदान – मैं लाचार नहीं, नारी हूँ, भारत माँ की पोषिता-
मैं रणचंडी लक्ष्मीबाई, सावित्री सी योषिता-
ये मत सोचो तेरे प्यार के वो दिन अब मैं भूल गयी-
तेरे पुण्य उत्सर्ग के कारण अवसादों में झूल गई-
मेरी डोली, तेरी अर्थी के अंतर, देखो प्रतिकूल हैं-
मैं आँचल से लिपटी निकली ,तेरे स्यंदन पर फूल हैं-
मै आई थी लिपटी-चुपड़ी, बस आंगन एक सजाने को-
तेरा स्यंदन आज ,गगन को, बस जयघोष सुनाने को-
ये वलिदानी अर्थी जैसे सजी-धजी मेरी डोली-
आज भी देखो !मैने पहनी है साड़ी फिर वो पीली-
भले प्राण से मुक्त हुएं तुम प्रियतम मुझ से दूर कहाँ है-
ग़म मत करना ,रक्षित है बसुधा, तेरी बेवा का पहरा है...



