लहर-लहर लहराये झंडा, अपने देशवा के लजिया बचाये झंडा...देशभक्ति गीत

रीता देवी साकेत ग्राम-गढ़वय, पोस्ट-मधरी, थाना-पनवार, जिला-रीवा, (मध्यप्रदेश) से देशभक्ति गीत सुना रही हैं:
लहर-लहर लहराये झंडा-
अपने देशवा के लजिया बचाये झंडा-
वीरों ने मरके तुझे ऊंचा किया हैं-
इस जग में न उनको सुख ना मिला है-
जीवन का उनके शांति दिलाये झंडा-
दर-दर ठोकर खाके बाबा साहेब संविधान बनाया-
जीवन में उनको कभी सुख न मिलाया-
संविधान के उनके सम्मान बढ़ाये झंडा...

Posted on: Aug 10, 2016. Tags: REETA DEVI SAKET SONG VICTIMS REGISTER

कच्चे अनार चार दाना, सुगन लिए आवत होहिहे...बघेली गीत

ममता देवी प्रजापति ग्राम पंचायत-बसरेही, ब्लॉक-जवा, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से एक गीत सुना रही है:
कच्चे अनार चार दाना-
सुगन लिए आवत होहिहे-
द्वि रे सखि मिल जेमना बनायवं-
जेवथ है कृष्ण मुरारी-
द्वि रे सखि मिल जल भर लायों-
घुटत कृष्ण मुरारी-
द्वि रे सखी मिल वीरा लगायों-
रचत हैं कृष्ण मुरारी-
कच्चे अनार चार दाना-
सुगन लिए आवत होहिहे...

Posted on: Jul 01, 2016. Tags: Mamta Devi Prajapati SONG VICTIMS REGISTER

बच्चों सुन लो नयी कहानी, यो हंसकर के बोली नानी...बाल कविता

रीता देवी ग्राम-गढ़वई, पोस्ट-मदरी, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से बच्चों के लिए एक कविता सुना रही है:
बच्चों सुन लो नयी कहानी,यो हंसकर के बोली नानी-
बहुत दिनों की बात बताऊँ,सच्चा-सच्चा हाल सुनाऊं – एक बहुत था लोभी भाई,जिसकी ज्यादा थी न कमाई
रूखी-सूखी रोटी खाता,दुःख से अपना समय बीतता-
पर किस्मत ने पलटा खाया,लोभी के घर में धन आया
उसने मुर्गी पाली एक, जो थी सीधी-साधी नेक – ज्यों ही होता रोज सबेरा,वह करती कुकड़ू-को टेरा
दो सोने के अंडे प्यारे, वह देती थी उठ दिन सारे – जब लोभी ने अंडा पकड़ा, ख़ुशी-ख़ुशी से समय बिताता
पर लोभी जी में ललचाया,यह विचार उसके मन में आया – क्यों न मार मुर्गी को डालूं,अंडे सारे साथ निकालूँ
हो जाऊंगा मालामाल,हेट रोज का ये जंजाल-
लोभी फ़ौरन चाकू लाया,मुर्गी मारी खून बहाया
अंडे उसने एक न पाया,रो-रो वह बहुत पछताया...

Posted on: Jun 13, 2016. Tags: REETA DEVI SONG VICTIMS REGISTER

कहाँ मा जन्में हैं फूल जी, कहाँ माँ सावित्री बाई हो...सोहर गीत-

साथी रीता देवी, ग्राम-गढ़वई,पोस्ट-मदरी, थाना-पनवार, जिला-रीवा,(मध्यप्रदेश) से भीमराव आंबेडकर जी पर आधारित एक गीत सुना रही है:
कहाँ मा जन्में हैं फूल जी, कहाँ माँ सावित्री बाई हो-
अब कहाँ माय जन्में हैं भीम राव संसार जाहिर हो-
अमेरिका में जन्में फूल, जी नएगावं साबित्री बाई-
अब महू माय जन्मे हैं भीम राव संसार जाहिर हो-
काहे का जन्में हैं फूल जी काहे का सावित्री बाई हो-
शिक्षा का जन्में हैं फूल जी,शिक्षा का सावित्री बाई-
अब आरक्षण का जन्में है भीमराव संसार जाहिर हो...

Posted on: Jun 09, 2016. Tags: REETA DEVI SONG VICTIMS REGISTER

सखी कइसे धरौं मन धीर घरै न आये कन्हैया...बघेलखंडी पारंपरिक गीत

ममता देवी प्रजापति ग्राम पंचायत-बसरेही, ब्लॉक-जवा, जिला-रीवा,(मध्यप्रदेश) से एक बघेलखंडी पारंपरिक गीत बहनी दरबार की एक साथी से रिकार्ड करा रही है :
सखी कइसे धरौं मन धीर घरै न आये कन्हैया-
चैत मॉस फूली फुलवारी प्रीतम छोड़ दिए मोरे आसन-
मैं तो बैठी रहती मारी-
बैशखवा मा सुखले शरीर,घरै न आये...
जेठ मॉस बहे दिल चैना-
उसके मन में परै न चैना-
छाये-छाये गुजरिया के देश,घरै न आये...
अषढै मास घुमडि जल बरसै-
घर से निकल चले मोरे प्रीतम-
देखन वाले को जिया तरसे पापी जिया न माने-
घरै न आये...

Posted on: May 22, 2016. Tags: Mamta Devi Prajapati SONG VICTIMS REGISTER

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