सखी कइसे धरौं मन धीर घरै न आये कन्हैया...बघेलखंडी पारंपरिक गीत
ममता देवी प्रजापति ग्राम पंचायत-बसरेही, ब्लॉक-जवा, जिला-रीवा,(मध्यप्रदेश) से एक बघेलखंडी पारंपरिक गीत बहनी दरबार की एक साथी से रिकार्ड करा रही है :
सखी कइसे धरौं मन धीर घरै न आये कन्हैया-
चैत मॉस फूली फुलवारी प्रीतम छोड़ दिए मोरे आसन-
मैं तो बैठी रहती मारी-
बैशखवा मा सुखले शरीर,घरै न आये...
जेठ मॉस बहे दिल चैना-
उसके मन में परै न चैना-
छाये-छाये गुजरिया के देश,घरै न आये...
अषढै मास घुमडि जल बरसै-
घर से निकल चले मोरे प्रीतम-
देखन वाले को जिया तरसे पापी जिया न माने-
घरै न आये...
