गले में और कितने लटकाएँ कंकाल, हम हैं तमिलनाडु के किसान...कविता-
मालीघाट ,मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सरला माहेश्वरी की कविता सुना रहे है:
हम हैं तमिलनाडु के किसान-
गले में और कितने-
लटकाएँ कंकाल-
और कितने दिन-
अधनंगे, नंगे-
धरती को बना थाली-
पेट को रखें ख़ाली-
कितने दिन मुँह में दबाएँ-
चूहे और घास-
बन जाए लाश-
अपने ही पेशाब से बुझाएँ प्यास-
तब तुम मानोगे-
हम हैवान-
काले भूत नहीं-
पहनें हैं खेतों में जली-
अपनी ही खाल-
बदहाल-
जीवित इंसान-
तमिलनाडु के किसान-
अभी कहाँ निकला कोई हल-
अभी कहाँ खाया-
हमने अपना मल-
कितनी हदें हैं-
तुम्हारी बेशर्मी की-
अभी देखना बाकी है वे पल...
Posted on: Apr 25, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
एक दीपक जलाए नए साल में, आवो सबको पढाए नए साल में...शिक्षा गीत -
ग्राम-नागाटोली, जिला-रोहतास, (बिहार) से हेमन्दरी कुमारी, एक शिक्षा गीत सुना रही है:
एक दीपक जलाए नए साल में, आवो सबको पढाए नए साल में-
देखो अनपढ़ रहे हम बहुत दिनों तक, कोई अनपढ़ रहे ना नए साल में-
एक दीपक जलाए नए साल में, आवों सबको पढाए नए साल में-
जो की शिक्षा की जग मग, करे हर तरफ-
आवों सबको पढाए, नए साल में-
सबको रोटी मिले, सबको कपड़ा मिले-
हम सभी पड़ने जाए, नए साल में...
Posted on: Apr 25, 2017. Tags: HEMNDRI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
मेरी पत्नी...कहानी -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कहानी सुना रहे हैं:
बहुत समय पूर्व की बात है एक युवक बहुत गुस्से में एक दिन बगीचे बैठा था वहीँ पर एक बुजुर्ग बैठे थे उन्होंने उनकी समस्या के विषय में पूछा तो युवक अपनी पत्नी की कमियों के बारे में बताने लगा तब बुजुर्ग ने उसके घर के कामो के बारे में जैसे सफाई करना, खाना बनाना, सभी का ध्यान रखना और सुख दुःख में कौन काम आता है पूछा जिस पर युवक ने जवाब दिया मेरी पत्नी ही यह सब काम करती है तब बुजुर्ग ने कहा उसकी इतनी सारी अच्छाई तुम्हे नही दिखी और एक कमी बड़ी आसानी से दिख गई तब युवक को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने बाद में अपनी पत्नी से माफी माँगी और उसके बाद वे सुखपूर्वक रहने लगे-सुनील@9308571702
Posted on: Apr 25, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
नाम तुम्हारा तारण हरा, कब तेरा दर्शन होगा...गीत-
ग्राम-बिजुरी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से राजकुमार एक गीत सुना रहे हैं :
नाम तुम्हारा तारण हरा, कब तेरा दर्शन होगा-
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो, कितना सुन्दर होगा-
सुर,नर,मूनी,जन,जिन चरणों में निस दिन ध्यान लगाते हैं-
जो भी तुम्हारे दर पे आते है,मन वांछित फल पाते हैं...
Posted on: Apr 24, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
खेत सभय भगवान लगत है, पिसी चना वरदान लगत है...कविता -
सुनील कुमार महेश कटारे सुगम की एक कविता सुना रहे है :
खेत सभय भगवान लगत है, पिसी चना वरदान लगत है-
अब आफत में प्राण लगत है, दीड गए सब और अब शान लगत है-
और जबसे परव तुषार ककाजू, सौवत सौवत चिल्लयांन लगत है-
फसलन को हो गोड दडोरा, ज़िन्दा लाश किसान लगत है-
भय्या कोऊ से बोलत नय्या, कछु कहो खिच्यान लगत है-
क़र्ज़ उगाए जब कोऊ आवे दद्दा बस, विज्ञान लगत है-
खेत सभय भगवान लगत है, पिसी चना वरदान लगत है...

