खेत सभय भगवान लगत है, पिसी चना वरदान लगत है...कविता -
सुनील कुमार महेश कटारे सुगम की एक कविता सुना रहे है :
खेत सभय भगवान लगत है, पिसी चना वरदान लगत है-
अब आफत में प्राण लगत है, दीड गए सब और अब शान लगत है-
और जबसे परव तुषार ककाजू, सौवत सौवत चिल्लयांन लगत है-
फसलन को हो गोड दडोरा, ज़िन्दा लाश किसान लगत है-
भय्या कोऊ से बोलत नय्या, कछु कहो खिच्यान लगत है-
क़र्ज़ उगाए जब कोऊ आवे दद्दा बस, विज्ञान लगत है-
खेत सभय भगवान लगत है, पिसी चना वरदान लगत है...
