आसमान की लाल परी, ऊपर से नीचे उतरी...बाल कविता
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से नितेश कुमार एक बाल कविता सुना रहे हैं :
आसमान की लाल परी, ऊपर से नीचे उतरी-
नये-नये उपहार सजाकर सपनो का संसार बसाकर-
खेल खिलौने और मिठाई सब बच्चे को देने आई...
Posted on: Dec 20, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कोनो जूगे आयो दिया बराबे हमरा ला...उड़िसा से आदिवासी विवाह गीत
ग्राम रुटकूपीढ़ी, ब्लाक लाठीकट्टा, जिला सुन्दरगढ़ (उड़ीसा) से ब्रुरूंगा बरला आदिवासियों के शादी ब्याह में गाये जाने वाला एक गीत सुना रहे हैं:
कोनो जूगे आयो दिया बराबे हमरा ला-
हा अग्नि बाबा बाति बराबे हमरा ला-
दिया बराबे बेटा दिन ना चली गेला-
हाय मोरे दया कोनो जूगे आयो-
बाति बराबे हमरा ला...
Posted on: Dec 20, 2016. Tags: BURUNGA BARLA SONG VICTIMS REGISTER
तोरा लावा मोरा लावा एक में मिलवा रे...बिहार से लावा गीत
सुनील कुमार मालीघाट,जिला-मुजफ्फरपुर,(बिहार) से विवाह में प्रयोग किया जाने वाला लावा गीत गा रहे हैं:
तोरा लावा मोरा लावा एक में मिलवा रे-
मोरा पापा तोरा अम्मा एक लगे बैठावा रे-
तोरा लावा मोरा लावा...
मोरा चाचा तोरा चाची एक लगे बैठावा रे-
तोरा लावा मोरा लावा...
मोरा दादा तोरा दादी एक लगे बैठावा रे-
तोरा लावा मोरा लावा...
मोरा फूफा तोरा फूफी एक लगे बैठावा रे-
तोरा लावा मोरा लावा...
Posted on: Dec 20, 2016. Tags: SONG Sunil Kumar VICTIMS REGISTER
मेरे सपनों का गाँव...कविता
तमनार जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक रचना सुना रहे हैं, रचना का शीर्षक है मेरे सपनों का गाँव :
प्रकृति की गोद में बसा वह एक छोटा सा गाँव, गाँव में मेरा छोटा घर-
आँगन में तुलसी चौरा फूल पौधा के छाव, यह मेरे सपनों का गाँव-
थोड़ी दूर पर एक छोटी सी नदियाँ पानी में धुन कल-कल किनारे बगुलों की-
मौन मन की हलचल सुबह का भ्रमण शौच स्नान के साथ प्रकृति का आनन्द-
इसके गीतों का श्रवण यह है मेरे सपनों का गाँव-
गलियोँ में खेलते बच्चें आधे नंगे आधे ढके खाते हुए अमरुद आम आधे कच्चे आधे पके-
हल चलाते किसान कटी फसलों से भरा खलियान-
बरसाती धारा में डूबता कागज की नाव, यह मेरे सपनों की गाँव-
माटी के हाड़ी में पकता हुआ चावल-
पेट में भूख की तीर क्योकिं स्कुल जाना है राम-रहीम के पाठ दोहराना है-
कड़क की धूप में अमरई की छाव यह मेरे सपनों की गाँव – गाँव में त्यौहार की महक सुबह शाम किरणों की चहक-
रात में अँधेरा जंगलो का सन्नाटा-
पूरब की लाली के साथ नदी तालाब-
खेतो का सर तपाता हुआ उबड़-खाबड़ धरती में चुभता नंगा पाँव-
यह मेरे सपनों गाँव-
एकांत शांत कोलाहल में बदलाव-
अब नहीं दिखाई देता बरगद पीपल की छाव-
यह नही हो सकता मेरे सपनो का गाँव-
मुझे नहीं चाहिए ऐसे निरस्त विकास-
मुझे चाहिए मेरा पुराना आकाश...
Posted on: Dec 19, 2016. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
चला-चला-चला बाबा के धाम चला...सावन का भजन
ग्राम डूमरखोरका, पंचायत भेलवाडीह, तहसील बलरामपुर, जिला बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से अनूपराम सावन महीना में गाये जाने वाला गीत सुना रहें हैं:
चला-चला-चला बाबा के धाम चला-
गंगा में जलवा भरा, खांडी में कावर डाला-
कट जा ही रे कठिनवा, चला कवरिया बोला बम बम बम-
चला-चला-चला भोला के धाम चला-
गंगा में जलवा भरा, खांडी में कावर डाला-
कट जा इ रे कठिनवा, चला कवरिया बोला बम बम बम...
