मेरे सपनों का गाँव...कविता
तमनार जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक रचना सुना रहे हैं, रचना का शीर्षक है मेरे सपनों का गाँव :
प्रकृति की गोद में बसा वह एक छोटा सा गाँव, गाँव में मेरा छोटा घर-
आँगन में तुलसी चौरा फूल पौधा के छाव, यह मेरे सपनों का गाँव-
थोड़ी दूर पर एक छोटी सी नदियाँ पानी में धुन कल-कल किनारे बगुलों की-
मौन मन की हलचल सुबह का भ्रमण शौच स्नान के साथ प्रकृति का आनन्द-
इसके गीतों का श्रवण यह है मेरे सपनों का गाँव-
गलियोँ में खेलते बच्चें आधे नंगे आधे ढके खाते हुए अमरुद आम आधे कच्चे आधे पके-
हल चलाते किसान कटी फसलों से भरा खलियान-
बरसाती धारा में डूबता कागज की नाव, यह मेरे सपनों की गाँव-
माटी के हाड़ी में पकता हुआ चावल-
पेट में भूख की तीर क्योकिं स्कुल जाना है राम-रहीम के पाठ दोहराना है-
कड़क की धूप में अमरई की छाव यह मेरे सपनों की गाँव – गाँव में त्यौहार की महक सुबह शाम किरणों की चहक-
रात में अँधेरा जंगलो का सन्नाटा-
पूरब की लाली के साथ नदी तालाब-
खेतो का सर तपाता हुआ उबड़-खाबड़ धरती में चुभता नंगा पाँव-
यह मेरे सपनों गाँव-
एकांत शांत कोलाहल में बदलाव-
अब नहीं दिखाई देता बरगद पीपल की छाव-
यह नही हो सकता मेरे सपनो का गाँव-
मुझे नहीं चाहिए ऐसे निरस्त विकास-
मुझे चाहिए मेरा पुराना आकाश...
